हिमाचल में कुपोषण और एनीमिया से निपटने को न्यूट्रिशन पॉलिसी मंजूर, आंगनबाड़ी से स्कूलों तक मिलेगा पहाड़ी खाना

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में कुपोषण, एनीमिया और बदलती जीवनशैली की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पोषण को सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और विकास से जोड़ने की अनूठी पहल की है। इसके तहत सुरक्षित अन्न-निरोगी जन अभियान के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश न्यूट्रिशन पॉलिसी-2026 को आधिकारिक मंजूरी दी गई है।

कैबिनेट की हालिया बैठक में स्वीकृत इस नई नीति के तहत पारंपरिक और पहाड़ी खानपान को आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूलों तक पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना और खानपान की आदतों को पौष्टिक बनाना है।

इस नीति के माध्यम से अगले 10 वर्षों में बच्चों में बौनेपन की दर को 10 प्रतिशत से कम लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा दुबलेपन की दर को पांच प्रतिशत से कम और कम वजन की दर को आठ प्रतिशत से नीचे लाने की योजना है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब को उन्नत किया जाएगा।

साथ ही मोबाइल फूड और वाटर टेस्टिंग लैब के जरिए मौके पर ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की पुख्ता व्यवस्था करने पर विशेष जोर दिया गया है। चावल, आटा, तेल, दूध और नमक जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों में आयरन, फोलिक एसिड तथा विटामिन ए और डी जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ाई जाएगी।

नीति के तहत पारंपरिक हिमाचली खाद्य पदार्थों को सरकारी पोषण योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके तहत कोदा, फाफरा, राजमाह, कुलथ, चौलाई, चिलगोजा और ताजे मौसमी फलों को पीएम पोषण तथा आंगनबाड़ी योजनाओं में बढ़ावा दिया जाएगा। पर्वतीय, जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों की भौगोलिक जरूरतों को ध्यान में रखकर जिला स्तर पर विशेष पोषण कार्ययोजनाएं भी तैयार की जाएंगी।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर स्थिति में है। इसके बावजूद राज्य में कुपोषण के दोहरे बोझ से निपटना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राज्य में बच्चों में बौनेपन की दर 20.6 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 29.3 प्रतिशत है। इसी तरह कम वजन और दुबलापन 10.4 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 19 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

राज्य में कम वजन के बच्चों का आंकड़ा 16.8 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 31.8 प्रतिशत से कम है। गंभीर तीव्र कुपोषण की दर यहां 2.4 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.2 प्रतिशत है। हालांकि अतिरिक्त मोटापे की दर 2.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 1.3 प्रतिशत से अधिक है। छह अलग-अलग विभाग मिलकर पोषण अभियान की पूरी कमान संभालेंगे।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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