Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। शाहपुर की बोह घाटी में पच्चीस घर नष्ट हो गए। राहत की बात यह है कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। डीसी हेमराज बैरवा ने मौके का दौरा किया। उन्होंने बेघर हुए सभी परिवारों को सरकारी जमीन देने का भरोसा दिया है।
इस प्राकृतिक आपदा से करीब अड़तीस परिवारों के दो सौ लोग प्रभावित हुए हैं। गढ़गूंन गांव में बारह और स्पैड़ा गांव में तेरह मकान पूरी तरह मलबे में बह गए। इसके अलावा नौ घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है और बारह अन्य पर खतरा बना हुआ है। कई गौशालाएं टूटने से पशुधन का भी भारी नुकसान हुआ है।
राहत कैंपों में शिफ्ट किए गए सभी प्रभावित लोग
प्रशासन ने खतरे को देखते हुए दोनों गांवों को तुरंत खाली करवा लिया है। बेघर हुए लोगों को स्थानीय स्कूल में बने राहत कैंप में रखा गया है। कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। सरकार की ओर से इन सभी लोगों को कपड़े, राशन और जरूरत का हर सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।
डीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि पहले पूरी तरह टूटे मकानों के लिए पंद्रह हजार रुपये की फौरी मदद दी गई थी। लेकिन अब तबाही को देखते हुए इस राशि को बढ़ाकर पचास हजार से एक लाख रुपये कर दिया गया है। प्रभावित परिवारों को यह बढ़ी हुई राहत राशि तेजी से बांटी जा रही है।
रास्ते बंद होने से रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही दिक्कत
राहत कार्यों में सबसे बड़ी परेशानी टूटे हुए रास्तों की वजह से आ रही है। पंचायत मुख्यालय तक तो सड़क बन गई है, लेकिन दोनों गांवों तक पैदल जाना पड़ रहा है। मशीनें न पहुंचने से लोग हाथों से मलबा हटा रहे हैं। इसके अलावा सेना की टीम भी मौके पर पहुंचकर लोगों का सामान निकाल रही है।
स्पैड़ा गांव के ऊपर पहाड़ी पर अब भी कुछ बड़ी चट्टानें अटकी हुई हैं। इन चट्टानों से भविष्य में बड़ा खतरा हो सकता है। प्रशासन की तकनीकी टीम ने इसका जायजा लिया है। मौसम साफ होते ही ब्लास्टिंग या मैनुअल तरीके से इन खतरनाक चट्टानों को हटाया जाएगा ताकि कोई नया हादसा न हो सके।
मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री ने बेघर लोगों की हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। प्रशासन ने नई जमीन की तलाश पूरी कर ली है। जल्द ही जमीन बांटने का काम शुरू होगा। डीसी ने सभी सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे प्रशासन की लिस्ट के हिसाब से ही जरूरी सामान दान करें।