Shimla News: हिमाचल प्रदेश में 27 साल बाद फिर से लॉटरी योजना शुरू करने की सुक्खू सरकार की कोशिश को शुरुआती झटका लगा है। राज्य लॉटरी विभाग की टेंडर प्रक्रिया में निजी कंपनियों ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते विभाग ने टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 14 सितंबर से बढ़ाकर 28 सितंबर कर दी है।
आर्थिक तंगी से जूझ रही राज्य सरकार ने अतिरिक्त कमाई के लिए लॉटरी योजना को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार को इस योजना से हर साल करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। हालांकि, शुरुआत में ही कंपनियों की ठंडी प्रतिक्रिया ने इस पूरे प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभाग ने देशभर की लॉटरी डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों को टेंडर में हिस्सा लेने का न्योता भेजा था। उम्मीद थी कि 14 सितंबर तक कई बड़ी कंपनियां अपनी बोली लगाएंगी, लेकिन तय तारीख तक अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब विभाग को उम्मीद है कि 14 दिन का अतिरिक्त समय देने से कंपनियां आगे आएंगी।
कंपनियों की कम दिलचस्पी की मुख्य वजह सख्त शर्तें, टैक्स स्ट्रक्चर और प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल हो सकते हैं। अगर 28 सितंबर तक भी कंपनियों ने आवेदन नहीं किए, तो सरकार को अपनी शर्तों में ढील देनी पड़ सकती है। शर्तों को आसान बनाकर ही कंपनियों को आकर्षित किया जा सकता है।
राज्य सरकार का कहना है कि पंजाब, केरल और सिक्किम जैसे राज्य लॉटरी से भारी राजस्व कमाते हैं। उस कमाई का उपयोग जनकल्याणकारी कामों में होता है। उसी तर्ज पर हिमाचल सरकार भी लॉटरी को आमदनी का नया जरिया मान रही है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारी जा सके।