New Delhi News: विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र ने मौसम में आ रहे बदलाव को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। प्रशांत महासागर में तेजी से ताकतवर हो रहे अल नीनो के कारण भारत के मौसम चक्र पर सीधा असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार इसके चलते आगामी सर्दियों में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ने की संभावना बहुत कम है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस साल दिसंबर और जनवरी में सामान्य से काफी कम ठंड महसूस होगी। गॉडजिला अल नीनो के सक्रिय होने से उत्तर और मध्य भारत में शीतलहर का प्रभाव लगभग दब सकता है। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में दिन और रात का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज होने के पूरे आसार हैं।
प्रशांत महासागर की सतह और गहराई में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। जुलाई में नीनो इंडेक्स के तहत समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से दो डिग्री ज्यादा मिला। बाद में यह बढ़कर दो दशमलव छह डिग्री तक पहुंच गया। समुद्र की गहराई में पानी सामान्य से आठ डिग्री ज्यादा गर्म रिकॉर्ड किया गया है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो का यह प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की शत-प्रतिशत आशंका है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है, “जैसे-जैसे समुद्र उबल रहा है, हमारी धरती चरमावस्था वाले मौसम के एक भयंकर जाल में फंसती जा रही है।” पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर तक के लिए देश में भारी अलर्ट जारी किया है। कृषि आधारित देश होने के कारण बारिश और तापमान में यह उतार-चढ़ाव गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। कई क्षेत्रों में भयंकर सूखे तो कहीं अनियंत्रित बारिश और बाढ़ का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन से पैदा हुई ग्लोबल वार्मिंग ने प्राकृतिक मौसमी चक्र को और अधिक अनियंत्रित कर दिया है। साल 2024 में पहले ही अत्यधिक गर्मी का इतिहास दर्ज हो चुका है। अब वैज्ञानिकों को आशंका है कि 2026 के अंत तक सक्रिय यह नया अल नीनो गर्मी के पिछले सभी आंकड़े पीछे छोड़ देगा।