Shimla News: हिमाचल प्रदेश में धीमे पड़े मॉनसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। बीते 24 घंटों में धर्मशाला में सबसे अधिक 87.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी शिमला सहित राज्य के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। भूस्खलन के कारण 67 सड़कें बंद हो गई हैं और 142 बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक धर्मशाला के बाद कांगड़ा में 68.8, कुफरी में 64.6, शिलारू में 54.6 और जोगिंदरनगर में 48 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। मलरांव, पालमपुर, स्लैपर, सराहन, नगरोटा सूरियां, कोटखाई और नैना देवी में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके साथ ही कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बिजली चमकी।
सड़कों के बंद होने से मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां 36 सड़कें अवरुद्ध हैं, जबकि कुल्लू में 11, कांगड़ा में 10, शिमला, सिरमौर और ऊना में तीन-तीन सड़कें बंद हैं। बिजली सप्लाई की बात करें तो मंडी में 92, शिमला में 34 और कुल्लू में 16 ट्रांसफार्मर बंद होने से बिजली गुल है।
शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के 15/20 क्षेत्र में फांचा कंडे के नीचे जंगल की जमीन धंस गई। इससे दर्जनों देवदार के पेड़ गिर गए। स्थानीय निवासियों के अनुसार जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के कारण यहां कटाव शुरू हुआ है। यदि यह भू-कटाव नहीं रुका, तो देवदार का पूरा जंगल प्रभावित हो सकता है।
सिरमौर के नाहन में बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने पर गिरि जटोंन डैम से पानी छोड़ा गया। इसके बाद निचले इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 12 से 18 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की है। इस दौरान कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार इस सीजन में अब तक सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक मॉनसून सीजन में हादसों के कारण 296 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 520 लोग घायल हुए हैं और 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बारिश और भूस्खलन से 129 घर, 17 दुकानें और 470 पशुशालाएं पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। 499 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इस मॉनसून सीजन में राज्य को अब तक 1,661 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें अकेले लोक निर्माण विभाग को 1,241 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।