Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दिव्यांगजनों के लिए हिम बस कार्ड के सालाना रिन्युअल की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने का निर्देश जारी किया है। अदालत ने सक्षम अधिकारियों से समीक्षा करने को कहा है कि क्या इस कार्ड को सालाना रिन्यू करने के बजाय एक बार में 5 साल के लिए जारी किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। अदालत ने यह फैसला शोभू राम गर्ग द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। इस फैसले से राज्य के हजारों दिव्यांग यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 के नियम 19 और 20 का हवाला दिया गया। वकील ने तर्क दिया कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र की वैधता रहने तक सभी मिलने वाली सुविधाएं जारी रहनी चाहिए। हर साल रिन्युअल कराने की इस प्रक्रिया से दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अदालत को बताया गया कि सालाना रिन्युअल की वजह से खासकर नेत्रहीन लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। याचिकाकर्ता ने मांग उठाई कि जब तक दिव्यांगता प्रमाणपत्र वैध रहे, तब तक बस कार्ड के रिन्युअल की जरूरत नहीं होनी चाहिए। इससे दिव्यांगजनों को बेवजह की कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिल सकेगी।
दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अदालत में अपना पक्ष रखा। निगम ने दलील दी कि यात्रियों के डाटा को ट्रैक और व्यवस्थित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर सिस्टम तैयार किया गया है। सभी तय श्रेणियों के लिए यह कार्ड अनिवार्य किया गया है ताकि व्यवस्था बनी रहे।
निगम ने कहा कि किसी एक श्रेणी को छूट देने से डाटा संकलित करने में समस्या आ सकती है। दिव्यांगता प्रमाणपत्र केवल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत मुफ्त सफर का लाभ उठाने के लिए श्रेणी चुनने का अधिकार देता है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी, जिसमें अधिकारियों को रिपोर्ट देनी होगी।