हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इंजीनियर-इन-चीफ नरिंदर पाल सिंह का सेवा विस्तार रद्द

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Shimla News: प्रदेश उच्च न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियर-इन-चीफ को मिले सेवा विस्तार को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रतिवादी नरिंदर पाल सिंह इस पद पर नहीं रहेंगे और उन्हें तत्काल कार्यभार छोड़ना होगा। साथ ही, अदालत ने सरकार को अप्रैल 2026 की चयन प्रक्रिया को 11 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ का फैसला

प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी नरिंदर पाल सिंह अब इंजीनियर-इन-चीफ के पद पर बने रहने के पात्र नहीं हैं और उन्हें तुरंत प्रभाव से इस पद का कार्यभार छोड़ना होगा। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में ‘काम नहीं, तो वेतन नहीं’ का सिद्धांत लागू नहीं होगा।

चयन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के निर्देश

अदालत ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि लोक निर्माण विभाग में इंजीनियर-इन-चीफ के पद को भरने के लिए अप्रैल 2026 में शुरू की गई चयन समिति की कार्रवाई को फिर से शुरू किया जाए। इस प्रक्रिया को पूरी तरह से आगे बढ़ाकर उसके निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। अदालत ने माना कि नरिंदर पाल सिंह को दिए गए सेवा विस्तार के कारण इस चयन प्रक्रिया को अवैध रूप से टाला गया था। अब इसे स्थापित मानदंडों और नियमों के अनुसार आगामी 11 नवंबर, 2026 तक या उससे पहले हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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