हिमाचल के सेब बागवान ने निकाली नई तरकीब, ढलान वाले बगीचों से फसल ढोने के लिए लगाया मोनोरेल सिस्टम

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में एक सेब बागवान ने मजदूरों की किल्लत और कठिन ढलानों पर फसल ढुलाई की समस्या से निपटने के लिए अपने बगीचे में अनोखा मोनोरेल सिस्टम स्थापित किया है।

पहाड़ी इलाकों में सेब की पेटियों को बगीचे से मुख्य सड़क तक पहुंचाना बागवानों के लिए एक बड़ी चुनौती रहता है। ढलान भरे रास्तों पर माल ढोने में बहुत समय, मेहनत और पैसा खर्च होता है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए कोटखाई के ढांगवी गांव के बागवान सुनील चौहान ने यह पहल की है।

हिमाचल की लगभग 5 से 6 हजार करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था हजारों परिवारों की आजीविका का जरिया है। हालांकि, बढ़ती दिहाड़ी, मजदूरों की कमी और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बागवानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। सुनील चौहान के बगीचे में काम करने वाले मजदूरों के चले जाने से ढुलाई का संकट खड़ा हो गया था।

सुनील चौहान ने समाधान के रूप में चीन के ग्वांगझोउ से 9 हॉर्स पावर का पेट्रोल इंजन और 100 मीटर लंबा ट्रैक मंगवाया। करीब 4.20 लाख रुपये की लागत से यह मोनोरेल सिस्टम तैयार किया गया है। यह मशीन 45 डिग्री की सीधी ढलान पर एक बार में 500 किलो से ज्यादा वजन उठाने में सक्षम है।

इस सिस्टम का उपयोग केवल सेब ढोने के लिए ही नहीं, बल्कि खाद, उर्वरक और क्रेट जैसे कृषि सामान को बगीचे में पहुंचाने के लिए भी किया जाएगा। सुनील चौहान के पास तीन बगीचे हैं, जिनसे सालाना लगभग 4 हजार पेटियां उत्पादित होती हैं। एक बगीचे में सफल परीक्षण के बाद इसे अन्य बगीचों में भी लगाया जाएगा।

सुनील चौहान इस तकनीक को जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के अन्य बागवानों के साथ भी साझा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई स्थानीय बागवानों ने इसे अपनाने की इच्छा जताई है। फिलहाल इलेक्ट्रिक इंजन की ज्यादा कीमत के कारण पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है, और बागवान इस पर सरकारी सब्सिडी की उम्मीद कर रहे हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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