Dehra News: कांगड़ा जिले के देहरा स्थित घियोरी पंचायत में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पंचायत के पूर्व प्रधान काका ने आरटीआई से मिले दस्तावेजों के आधार पर पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मामले की निष्पक्ष जांच और रिकवरी कराने की मांग की है।
देहरा उपमंडल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घियोरी के पूर्व प्रधान ‘काका प्रधान’ ने पंचायत में हुए विकास कार्यों में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पंचायत सचिव के कार्यकाल में जो भी निर्माण कार्य करवाए गए, वे या तो अधूरे छोड़े गए हैं या फिर नियमों की अनदेखी कर घटिया तरीके से किए गए हैं।
पूर्व प्रधान का कहना है कि उन्होंने इन तमाम मामलों का पूरा ब्योरा सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त किया है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत में स्वीकृत कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोषी कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके चलते उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
काऊ शेड निर्माण और बिलों के सत्यापन में फर्जीवाड़े का आरोप
पूर्व प्रधान ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि पंचायत में स्वीकृत हुए 42 काऊ शेड में से शुरुआती 4 शेड के निर्माण और भुगतान में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। लगाए गए बिलों में हस्ताक्षरों में विसंगतियां हैं और कई बिलों का मौके पर सही तरीके से सत्यापन ही नहीं किया गया।
आरोप यह भी है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम पर भी काऊ शेड स्वीकृत कर दिए गए, जिनके पास अपनी जमीन तक दर्ज नहीं है। पूर्व प्रधान का दावा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में पंचायत सचिव के साथ-साथ तकनीकी सहायक की भी मिलीभगत रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी बीडीओ (BDO) कार्यालय में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जहां प्राथमिक स्तर पर संबंधित कर्मी दोषी पाया गया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते मामले को दबाने की कोशिश की गई।
दबाव बनाने और हमलों के बावजूद निष्पक्ष जांच की मांग
पूर्व प्रधान काका ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें प्रताड़ित करने की नीयत से झूठे मुकदमों में फंसाया गया और उन पर जानलेवा हमला भी करवाया गया ताकि वे चुप बैठ जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के दबाव के आगे न तो झुकेंगे और न ही पीछे हटेंगे।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की है कि घियोरी पंचायत में हुए सभी निर्माण कार्यों और बजट आवंटन की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। उनका दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो पंचायती राज के सरकारी धन के दुरुपयोग के बड़े खुलासे होंगे और सरकारी खजाने की भारी रिकवरी संभव हो सकेगी।