District News: खनिज न्यास (DFM) फंड से जिले के परिषदीय स्कूलों में लगवाए गए स्मार्ट टीवी, वाटर कूलर, इनवर्टर और झूलों के महज एक साल के भीतर ही खराब होने की शिकायतों पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने जिला प्रशासन को पूरी गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए हैं, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है।
बीस करोड़ की लागत से लगाए गए थे उपकरण
जिले के परिषदीय स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 में खनिज न्यास (डीएफएम) से बेसिक शिक्षा के करीब दो सौ स्कूलों में 20 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई थी। इन स्कूलों में बच्चों के लिए वाटर कूलर, स्मार्ट टीवी, इनवर्टर और पांच प्रकार के झूले लगवाए गए थे, ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ शुद्ध ठंडा पानी और खेलकूद के साधन मिल सकें। इस पूरी परियोजना की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम, कानपुर को बनाया गया था।
एक साल में ही उपकरण और झूले टूटने की शिकायतें
स्थापना के महज एक साल के भीतर ही स्कूलों में लगे झूले टूटने लगे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होने की शिकायतें सामने आने लगीं। जब यह मामला शासन के संज्ञान में पहुंचा, तो भूतत्व एवं खनिज विभाग के अनुसचिव धर्मपाल पांडेय ने जिला प्रशासन को इसकी उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए। इसके बाद स्कूलों में लगाए गए सामान की गुणवत्ता की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बीएसए ने मांगी सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट
मामले पर जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मुकेश खरवार ने बताया कि खनिज न्यास द्वारा लगवाए गए सामान और उपकरणों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली गई है। इसके लिए जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को पत्र जारी कर अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।