Delhi News: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के जून ड्रग अलर्ट में देशभर की 159 दवाओं और कास्मेटिक के सैंपल फेल हो गए हैं। इसमें 132 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और 27 केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
फेल हुए नमूनों में एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द, बुखार, बच्चों के सीरप, खांसी, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल हैं। ज्यादातर दवाएं डिसाल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय तत्व (एपीआइ) की मात्रा जैसे अहम मानकों पर विफल रही हैं।
हिमाचल की 45 और उत्तराखंड की 30 दवाएं फेल
गुणवत्ता जांच में सबसे ज्यादा हिमाचल प्रदेश की 45 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके बाद उत्तराखंड की 30 और गुजरात की 28 दवाओं के सैंपल फेल मिले हैं। मध्य प्रदेश के 13, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और सिक्किम की सात-सात दवाओं के सैंपल भी मानकों पर असफल रहे।
हिमाचल के बद्दी, नालागढ़, कालाअंब, पांवटा साहिब और सोलन की इकाइयों में बनी इटोडोलैक (बैच पीएनटी5-1754ए), एडनोसाइन इंजेक्शन (बैच आइ5के048) और टेलमिस्ट्रन 80 एमजी (बैच पीटी50022ए) का सैंपल फेल हुआ है। गुजरात का परमेथरिन मेडिकेटिड सोप (बैच 9147) और बिहार का मेग्निजियम सल्फेट इंजेक्शन (बैच 201) भी मानक पर खरा नहीं उतरा।
तमिलनाडु की रेनिटिडाइन ओरल सोल्यूशन (बैच आरएएन191) और अजिथ्रोमाइसिन ओरल सस्पेंशन (बैच 26150) के सैंपल फेल हुए हैं। उत्तराखंड के रुड़की में निर्मित सिट्राजिन सीरप (बैच सीआइजैड-2604), गामा बेंजेंन हैक्साक्लोराइड लोशन (बैच 6पी46), एमपी का ओआरएस (बैच 4047) और महाराष्ट्र का जेंटामाइसिन इंजेक्शन (बैच 683511) भी जांच में फेल हुआ।
कंपनियों को नोटिस और बिक्री पर लगी रोक
राज्य औषधि नियंत्रक डा. मनीष कपूर ने बताया, “हिमाचल की जिन दवा कंपनियों के सैंपल फेल पाए गए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने सहित नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। कंपनियों से जवाब मांगा है। जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”