Shimla News: हिमाचल प्रदेश के लोगों का पारंपरिक आयुष चिकित्सा पद्धतियों पर भरोसा तेजी से बढ़ा है। राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण में 57.2 फीसदी उपयोग दर के साथ राज्य पूरे देश में शीर्ष पर रहा है। राष्ट्रीय औसत केवल 28.4 फीसदी है, जिसके मुकाबले हिमाचल काफी आगे निकल गया है।
स्वास्थ्य केंद्रों और पंचकर्म थेरेपी का हुआ विस्तार
अखिल भारतीय आयुष सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में आयुष स्वास्थ्य केंद्रों, पंचकर्म तकनीशियन पाठ्यक्रमों और नई थेरेपी सुविधाओं के तेजी से विस्तार से यह उपलब्धि मिली है। कई बड़े राज्य इस मामले में काफी पीछे हैं, जबकि हिमाचल के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन उपचारों की लोकप्रियता बढ़ी है।
सर्वेक्षण में देशभर के 1.81 लाख से अधिक परिवारों से आंकड़े जुटाए गए थे। इसमें 1.04 लाख ग्रामीण और 77 हजार से ज्यादा शहरी परिवार शामिल रहे। रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 95 फीसदी लोग आयुष प्रणालियों से परिचित हैं और बीमारियों से बचाव के लिए इनका नियमित उपयोग कर रहे हैं।
प्राकृतिक संसाधनों और कम लागत से बढ़ा रुझान
हिमाचल की संस्कृति और प्राकृतिक जीवनशैली में आयुर्वेद का गहरा महत्व रहा है। औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की स्थानीय उपलब्धता के कारण ये पद्धतियां बेहद सस्ती और सुलभ हैं। किसी तरह का दुष्प्रभाव न होने से लोग पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए पारंपरिक दवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आयुष निदेशक रोहित जमवाल के अनुसार अस्पतालों में उन्नत तकनीक और बेहतर थेरेपी मिलने से मरीजों का भरोसा मजबूत हुआ है। रिकांगपिओ के जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रवीण वैद्य ने बताया कि सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी लोग सबसे पहले आयुष केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।