Bilaspur News: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में पशुओं में फैले लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप अब नियंत्रण में आने लगा है। वायरस के मामलों में कमी आने से पशुपालकों और पशुपालन विभाग ने राहत महसूस की है। जिले में अब तक 131 पशु इस वायरस की चपेट में आए हैं, जिनमें से पांच पशुओं की जान जा चुकी है।
राहत की खबर यह है कि 76 मवेशी सही इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 50 पशुओं का उपचार अभी चल रहा है। संक्रमण की चेन को पूरी तरह से तोड़ने के लिए पशुपालन विभाग ने बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है। विभाग ने 17,079 संवेदनशील पशुओं के टीकाकरण का टारगेट रखा है।
अभियान के तहत अब तक जिले में 7,371 पशुओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंसों को प्रभावित करती है। यह वायरस खून चूसने वाले कीटों, जैसे मक्खी, मच्छर और टिक्स के जरिए तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है।
लंपी के लक्षण दिखने पर तुरंत करें बचाव
पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गोल उभरी गांठें, आंख-नाक से पानी बहना, भूख न लगना और दूध उत्पादन में कमी इसके मुख्य लक्षण हैं। यह एक वायरल बीमारी है, इसलिए इसका कोई सीधा एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। लक्षण दिखने पर पशुपालक तुरंत संक्रमित पशु को बाकी स्वस्थ मवेशियों से अलग कर दें।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. सतीश कपूर ने बताया कि जिले में 76 पशु ठीक हो चुके हैं और स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है। पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने सलाह दी है कि गोशाला के आसपास साफ-सफाई रखें, कीटनाशकों का छिड़काव करें और पशु चिकित्सक के परामर्श से ही उपचार शुरू करें।