अमरावती में कम बारिश के चलते जलजनित बीमारियों का खतरा, जिला परिषद ने जारी किए कड़े निर्देश

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Amravati News: जिले में इस वर्ष कम बारिश के कारण संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला परिषद प्रशासन सतर्क हो गया है। जलजनित और कीटजनित बीमारियों से बचाव के लिए विशेष स्वास्थ्य कार्ययोजना लागू की गई है। इसके तहत सभी ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति स्रोतों के नियमित कीटाणुशोधन, ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त स्टॉक रखने और गांवों में फॉगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अमरावती जिले में इस साल सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की भारी कमी की आशंका जताई जा रही है। जल संकट के दौरान दूषित पानी के उपयोग और अस्वच्छता से जलजनित और कीटजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस संभावित खतरे को देखते हुए जिला परिषद प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक विस्तृत स्वास्थ्य कार्ययोजना तैयार की है।

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी ने सभी ग्राम विकास अधिकारियों, तालुका स्वास्थ्य अधिकारियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पानी की कमी के दौरान किसी भी प्रकार की महामारी फैलने से रोकने के लिए समय रहते सभी आवश्यक प्रतिबंधात्मक उपाय युद्धस्तर पर लागू किए जाएं।

दूषित पानी और मच्छरों से फैलने वाले रोगों पर निगरानी

प्रशासन के अनुसार, जल स्रोतों में जलस्तर घटने पर पानी दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में गैस्ट्रोएंटेराइटिस, हैजा, टाइफाइड, पीलिया और दस्त जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का जोखिम रहता है।

इसके साथ ही, गांवों में जलभराव और अस्वच्छता की स्थिति मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में वृद्धि हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण इलाकों में विशेष निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जलापूर्ति स्रोतों का कीटाणुशोधन और फॉगिंग अनिवार्य

जिला परिषद प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि आम जनता तक पहुंचने वाले पानी का उचित कीटाणुशोधन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति के मुख्य स्रोतों, कुओं और पानी की बड़ी टंकियों में तय मानकों के अनुसार नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने को कहा गया है।

प्रशासन ने सभी पंचायतों को अपने पास ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त स्टॉक रखने का आदेश दिया है। इसके अलावा, मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए गांवों में फॉगिंग मशीनों का नियमित संचालन करने और सार्वजनिक स्थलों सहित घरों के आसपास सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

नागरिकों तक सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों, आशा स्वयंसेविकाओं और एएनएम को घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां वितरित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी शुद्ध करने के सही तरीकों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आपसी तालमेल से काम करें, ताकि कुओं और टंकियों की सफाई समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके और संभावित बीमारियों के प्रसार को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सके।

सुरक्षित और उबला पानी इस्तेमाल करने की अपील

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण पारिसे ने कहा कि कम वर्षा के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं, जिनसे निपटने के लिए स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह तैयार है। उन्होंने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि वे पीने के लिए केवल उबले हुए या पूरी तरह सुरक्षित पानी का ही उपयोग करें।

डॉ. पारिसे ने लोगों से अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। कम बारिश से उत्पन्न हालात में ग्रामीणों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखने के लिए ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य विभाग की यह समन्वित कार्ययोजना बेहद अहम मानी जा रही है।

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