New Delhi News: एम्स नई दिल्ली के नेशनल आई बैंक ने लगातार चौथे साल 1,300 से अधिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट कर रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025 में 1,775 दृष्टिहीन मरीजों को नई रोशनी दी गई। 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के दौरान डॉक्टरों ने टिश्यू उपयोग और नेत्रदान में हुई इस महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी।
अस्पताल मॉडल से मिली सफलता और बेहतर रिकवरी
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, संस्थान ने वर्ष 2025 में कुल 2,167 कॉर्निया एकत्रित किए। इनमें से 1,775 कॉर्निया हॉस्पिटल कॉर्नियल रिट्रीवल प्रोग्राम के जरिए हासिल किए गए। यह कुल संख्या का 81.9 प्रतिशत है। इस मॉडल से अच्छी गुणवत्ता वाले डोनर कॉर्निया की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है।
डॉ. आरपी सेंटर की प्रमुख डॉ. राधिका टंडन ने बताया कि पिछले 61 वर्षों में 38 हजार से अधिक कॉर्निया एकत्रित किए गए हैं। इनके जरिए 28 हजार से ज्यादा लोगों की दृष्टि लौटाई गई। साथ ही, सेंटर ने 500 से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञों को एडवांस्ड कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जरी की आधुनिक ट्रेनिंग दी है।
आधुनिक तकनीक और ‘एक डोनर, कई रिसीवर’ पहल
प्रोफेसर डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि संस्थान ने ‘एक डोनर, कई रिसीवर’ तकनीक को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। मेम्ब्रेन-पीलिंग तकनीक से एक डोनर कॉर्निया से कई मरीजों का इलाज संभव हुआ है। बिना टांके वाली नई तकनीक से मरीज की आंखों की रोशनी बहुत तेजी से सामान्य हो जाती है।
टिश्यू आपूर्ति मजबूत करने के लिए राम मनोहर लोहिया, इंदिरा गांधी और नॉर्दर्न रेलवे अस्पताल के साथ करार हुआ है। इसके अलावा, कॉर्निया को सुरक्षित रखने वाला स्वदेशी लिक्विड ‘एक्सस्टोरसोल’ 130 आई बैंकों को भेजा गया। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में विजन सेंटर और ऑनलाइन आई डोनेशन सिस्टम भी शुरू किया गया है।