नाना पाटेकर का सेना प्रेम और समाज सेवा, कारगिल में बिताए थे दिन और किसानों के लिए शुरू किया फाउंडेशन

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Pune News: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने फिल्म ‘प्रहार’ के लिए बेलगावी केंद्र में तीन साल तक कड़ा सैन्य प्रशिक्षण लिया था। वह टेरिटोरियल आर्मी में मानद कैप्टन बने और कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने अग्रिम चौकियों पर सैनिकों के साथ रहकर देश सेवा की मिसाल पेश की थी।

अभिनय के साथ नाना पाटेकर का दिल हमेशा भारतीय सेना और देश के जवानों के लिए धड़कता रहा। साल 1999 के कारगिल युद्ध के नाजुक दौर में उन्होंने सेना मुख्यालय से अग्रिम मोर्चे पर जाने की विशेष अनुमति मांगी थी। इसके बाद वह द्रास और कुपवाड़ा जैसे संवेदनशील इलाकों में जवानों के साथ रहे।

किसानों के दर्द को देखकर शुरू किया नाम फाउंडेशन

सिनेमा की चकाचौंध से दूर नाना पाटेकर हमेशा ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से जुड़े रहे। साल 2015 में जब महाराष्ट्र गंभीर सूखे की चपेट में था, तब किसानों की लाचारी देखकर वह बेहद व्यथित हुए। उन्होंने नई कार खरीदने के लिए जमा डेढ़ करोड़ रुपये जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए दान कर दिए।

किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने के लिए उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की नींव रखी। संस्था ने जल संकट दूर करने के लिए नदियों को गहरा करने, तालाबों के जीर्णोद्धार और गाद निकालने की व्यापक मुहिम छेड़ी, जिससे हजारों परिवारों को नया जीवन मिला।

Desh Raj
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