Delhi News: कॉमर्स या फाइनेंस के छात्र अक्सर सीए और सीएस को ही सफलता का एकमात्र रास्ता मानते हैं। लेकिन आज के दौर में चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट यानी सीएफए कोर्स युवाओं की पहली पसंद बन रहा है। इस इंटरनेशनल कोर्स की मांग पूरी दुनिया में बहुत ज्यादा है।
सीएफए कोर्स करने के बाद युवाओं को इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में शानदार करियर के अवसर मिलते हैं। जहां सीए मुख्य रूप से ऑडिटिंग और टैक्स पर ध्यान केंद्रित करता है, वहीं सीएफए का पूरा फोकस शेयर बाजार, वेल्थ मैनेजमेंट और बड़ी कंपनियों में निवेश पर होता है।
कौन कर सकता है सीएफए कोर्स और क्या है योग्यता
इस प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश के लिए किसी बहुत जटिल डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है। ग्रेजुएशन पूरा कर चुके या ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में पढ़ाई कर रहे छात्र सीएफए परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उम्मीदवार के पास एक वैध इंटरनेशनल पासपोर्ट होना अनिवार्य है।
सीएफए की परीक्षा तीन चुनौतीपूर्ण लेवल्स में आयोजित की जाती है। पहले लेवल में फाइनेंस और इकोनॉमिक्स के बेसिक कॉन्सेप्ट्स शामिल होते हैं। दूसरे लेवल में एसेट वैल्यूएशन और तीसरे लेवल में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सिखाया जाता है। तीनों लेवल्स पास करने और वर्क एक्सपीरियंस के बाद चार्टर मिलता है।
लाखों में मिलती है शुरुआती सैलरी और तगड़ा पैकेज
सीएफए पास करने वाले अभ्यर्थियों को जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियां हाथों-हाथ लेती हैं। भारत में एक फ्रेशर सीएफए को शुरुआत में ही 8 से 12 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल जाता है, जो अनुभव के साथ 30 से 50 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
भारत के सीए से कैसे अलग और बेहतर है सीएफए
भारतीय सीए मुख्य रूप से देश के टैक्स और अकाउंटिंग कानूनों के हिसाब से काम करता है। इसके विपरीत सीएफए की डिग्री पूरी तरह ग्लोबल मान्यता रखती है। इस कोर्स को करने के बाद अमेरिका, लंदन, सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में नौकरी के रास्ते आसानी से खुल जाते हैं।
इस पूरे कोर्स में लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक का खर्च आता है। हालांकि, इसे एक बेहतरीन करियर इन्वेस्टमेंट के रूप में देखा जाता है। शेयर बाजार और ग्लोबल फाइनेंस में बड़ा मुकाम हासिल करने के ख्वाहिशमंद युवाओं के लिए यह कोर्स एक बहुत अच्छा विकल्प है।