Chandigarh News: हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों और निगमों से जुड़े 504 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई तेज हो गई है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. साकेत कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन अधिकारियों पर नियमों की अनदेखी कर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सरकारी खाते खुलवाने के गंभीर आरोप हैं। अधिकारियों ने वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए निर्धारित सीमा से कहीं अधिक धनराशि चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा में जमा करवाई, जिससे सरकारी नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ।
निर्धारित सीमा से अधिक जमा करवाई गई धनराशि
वित्त विभाग के नियमों के अनुसार किसी एक बैंक में सरकारी धन जमा कराने की अधिकतम सीमा 50 करोड़ रुपये तय की गई थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने मिलीभगत कर करोड़ों रुपये इस निजी बैंक शाखा में ट्रांसफर करवाए। इस मामले में आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार, राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल पहले से ही जेल में बंद हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जिन अधिकारियों को जांच के दौरान हिरासत में नहीं लिया गया और उनके खिलाफ सीधे चार्जशीट पेश की गई है, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में नियमित जमानत मिलने में कुछ आसानी हो सकती है। हालांकि जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए मजबूत तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन की कथित भूमिका
सीबीआई जांच के अनुसार पूर्व आईएएस अधिकारी विनीत गर्ग की मुख्य भूमिका हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के खाते खुलवाने से जुड़ी पाई गई है। आरोप है कि 50 करोड़ रुपये की तय सीमा का उल्लंघन करते हुए उन्होंने तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक शाखा में भारी सरकारी पूंजी जमा करवाई।
वहीं आईएएस अधिकारी मोहम्मद शाइन पर हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़ी धनराशि को इसी निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप लगा है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन सभी अधिकारियों ने वित्तीय सुरक्षा के मानकों को नजरअंदाज कर सरकारी खजाने को जोखिम में डालने का काम किया।