Shimla News: वर्ष 2017 के चर्चित कोटखाई गुड़िया मामले में आरोपी सूरज की कस्टोडियल डेथ के अहम गवाह पुलिस कांस्टेबल दिनेश शर्मा के निलंबन पर विवाद गहरा गया है। परिजनों ने शिमला में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि सच बोलने के कारण वरिष्ठ अधिकारी उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।
डेढ़ महीने में पांच बार किया गया तबादला
दिनेश के भाई सुरेश शांडिल्य और मां ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में दिनेश का पांच बार तबादला किया गया। बेटे की दिव्यांगता का हवाला देकर तबादला रोकने की गुहार लगाने पर अधिकारियों ने उन्हें प्रताड़ित किया। इसके बाद समस्या लेकर राजभवन पहुंचने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।
सच्ची गवाही देने के कारण वर्षों से प्रताड़ना का दावा
परिवार का कहना है कि 2017 में सीबीआई जांच के दौरान दिनेश शर्मा पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया था। उनके इनकार करने पर दी गई सच्ची गवाही के आधार पर ही तत्कालीन आईजी सहित आठ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद हुई। इसी रंजिश के कारण उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है।
दिव्यांग बेटे की वजह से मांगा था होम स्टेशन
दिनेश शर्मा के बेटे के चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उन्हें चौपाल में होम स्टेशन दिया गया था। अचानक तबादला होने पर उन्होंने समस्या बताई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि लगातार मानसिक तनाव के कारण दिनेश की जान को भी गंभीर खतरा बना हुआ है।
मां ने लगाई न्याय और सुरक्षा की गुहार
प्रेस वार्ता में दिनेश की मां भावुक हो गईं और बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। परिजनों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक को शिकायत भेजी है। न्याय न मिलने पर परिवार ने हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। हालांकि पुलिस का रुख अभी सामने नहीं आया है।
क्या था 2017 का बहुचर्चित गुड़िया कांड
कोटखाई में 4 जुलाई 2017 को स्कूली छात्रा लापता हुई थी और 6 जुलाई को उसका शव मिला था। एसआईटी जांच के दौरान हिरासत में आरोपी सूरज की मौत हो गई थी। सीबीआई जांच में कांस्टेबल दिनेश शर्मा की गवाही बेहद अहम साबित हुई थी, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को सजा मिली।