New Delhi News: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर संसद में भी चर्चा हुई थी। विपक्ष इस मामले में केवल भ्रम और दुष्प्रचार फैलाने का काम कर रहा है।
सेवा सुधार के लिए सिस्टम शुल्क, सरकारी खजाने में नहीं जाएगा
वित्त मंत्री ने बताया कि एमडीआर कोई नया टैक्स या सेस नहीं है, बल्कि सिस्टम सुधारने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स का आंतरिक चार्ज है। यह पैसा देश के सरकारी खजाने में जमा नहीं होगा। एनपीसीआई के नए ढांचे के मुताबिक दो हजार रुपये से कम के छोटे भुगतानों पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा।
नए नियमों के तहत दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों पर शून्य दशमलव चार प्रतिशत एमडीआर लगेगा। आम जनता पहले की तरह पूरी तरह फ्री में डिजिटल लेनदेन करती रहेगी। सरकार का अनुमान है कि इस नए सिस्टम से देश के 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन पूरी तरह अप्रभावित रहेंगे।
विपक्ष के हमलों और फंड भेदभाव के आरोपों पर तीखा पलटवार
सीतारमण ने इंदौर में राहुल गांधी की मिमिक्री पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे नेता को ऐसा आचरण शोभा नहीं देता। इसके अलावा उन्होंने पंजाब सरकार के फंड भेदभाव के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों को तय हिस्सेदारी के अनुसार पूरा फंड बिना कटौती मिलता है।