शेयर बाजार में आईपीओ आवंटन की कमी के बीच अब रिटेल निवेशकों का रुझान प्री-आईपीओ कंपनियों में तेजी से बढ़ रहा है

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Delhi News: शेयर बाजार में बेहतर रिटर्न पाने के लिए रिटेल निवेशक अब तेजी से प्री-आईपीओ कंपनियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मुख्य आईपीओ में सीमित शेयर आवंटन मिलने के कारण लोग अनलिस्टेड बाजार का रुख कर रहे हैं। अब रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म और नए नियमों की मदद से आम निवेशक भी शेयर लिस्टिंग से पहले निवेश कर सकते हैं।

क्या है प्री-आईपीओ निवेश और कैसे करें सही शुरुआत

प्री-आईपीओ निवेश का सीधा मतलब कंपनी के शेयर लिस्ट होने से पहले खरीदारी करना है। इससे निवेशकों को कंपनी के शुरुआती विकास चरण से जुड़ने का मौका मिलता है। पहले यह विकल्प केवल संस्थागत और बड़े निवेशकों तक सीमित था। अब निवेशक सेबी नियमों का पालन करने वाले प्लेटफॉर्म, पीएमएस, एआईएफ या भरोसेमंद ब्रोकर के जरिए निवेश कर सकते हैं।

निवेश से पहले कंपनी की जांच-पड़ताल करना है जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार पैसा लगाने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय सेहत और बैलेंस शीट की गहराई से जांच करनी चाहिए। इसके अलावा प्रमोटर्स के ट्रैक रिकॉर्ड, प्रबंधन की गुणवत्ता और बाजार प्रतिस्पर्धा का आकलन करना भी आवश्यक है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि कंपनी फंड क्यों जुटा रही है और उसका उपयोग किस काम में किया जाएगा।

अनलिस्टेड शेयर बाजार में निवेश के मुख्य जोखिम समझें

कंपनी के लिस्ट होने पर बेहतर प्रदर्शन से निवेशकों को संपत्ति निर्माण का लाभ मिलता है, लेकिन जोखिम भी हैं। अनलिस्टेड शेयरों में तरलता कम होती है, जिससे जरूरत पड़ने पर बेचना कठिन होता है। कई बार आईपीओ टल सकता है। साथ ही वैल्यूएशन तय करना कठिन होने से कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन और लंबी अवधि का रखें नजरिया

विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी एक कंपनी में बड़ी पूंजी लगाने के बजाय अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें। निवेश के लिए हमेशा सेबी और नियामकीय मानकों का पालन करने वाले अधिकृत प्लेटफॉर्म का ही चयन करें। इसके अलावा प्री-आईपीओ निवेश को हमेशा लंबी अवधि के नजरिए से देखें ताकि भविष्य में बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके।

Desh Raj
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