New Delhi News: प्रमुख भारतीय आईटी कंपनी इन्फोसिस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) कार्यक्रम के तहत नए और लंबित आवेदनों पर रोक लगाने के फैसले से उसके कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने शेयर बाजारों को सूचित किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।
आठ प्रमुख आईटी कंपनियों पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन ने घरेलू श्रमिकों के रोजगार के अवसरों की सुरक्षा का हवाला देते हुए आठ दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। इस सूची में इन्फोसिस के अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी भारत की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। पीईआरएम प्रक्रिया विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का पहला चरण होती है।
कंपनियों की स्थानीय भर्ती नीति और घटते आवेदन
इन्फोसिस का कहना है कि उसने अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती और इनोवेशन केंद्रों के विकास में भारी निवेश किया है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों से साफ होता है कि भारतीय कंपनियों ने पीईआरएम आवेदनों पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है। इसके चलते इस रोक का परिचालन स्तर पर प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
आंकड़ों में पीईआरएम आवेदनों की भारी गिरावट
आंकड़ों के अनुसार टीसीएस ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में केवल 2 आवेदन दाखिल किए, जबकि 2024 में यह संख्या 1,804 थी। एचसीएल ने 2026 में 59 आवेदन किए, जो 2025 में 323 थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कुल आवेदनों में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम है, जिससे इसका सीधा असर काफी कम होगा।
