Delhi News: देश में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चीनी उद्योग द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ लिमिटेड के कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि सरकार चीनी या अन्य कृषि उत्पादों के दाम तय नहीं कर सकती।
वैश्विक बाजार के नियमों पर निर्भर करती हैं कृषि दरें
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि हम एक वैश्विक अर्थव्यवस्था में काम कर रहे हैं। यहां कोई भी सरकार कृषि उत्पादों के दाम तय नहीं कर सकती है। उन्होंने समझाया कि चीनी के दाम ब्राजील, मक्के के भाव अमेरिका और पाम ऑयल की दरें मलेशिया से सीधे तौर पर तय होती हैं।
राजनीतिक बयानबाजी पर उन्होंने टिप्पणी की कि विपक्ष में रहते हुए किसानों के समर्थन में मांग उठाना बहुत आसान होता है। हालांकि, सरकार में आने के बाद इन फैसलों को व्यावहारिक रूप से लागू करने में भारी परेशानियां आती हैं। इसलिए उद्योग को वैश्विक बाजार की जमीनी हकीकत को समझना होगा।
ब्राजील और भारत में चीनी उत्पादन लागत का अंतर
वैश्विक बाजार का गणित समझाते हुए गडकरी ने कहा कि ब्राजील में दो से तीन हजार एकड़ के बड़े फार्म हैं। वहां आधुनिक मशीनों से काम होता है, जिससे लागत महज 23 रुपये प्रति किलो आती है। वहीं भारत में यह खर्च 33 से 34 रुपये प्रति किलो पड़ता है।
उन्होंने साफ किया कि जब भी ब्राजील में अतिरिक्त स्टॉक तैयार होता है, तो भारत में चीनी के दाम अपने आप गिरने लगते हैं। इसलिए मिलों को केवल चीनी बेचने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय गन्ने के अन्य सह-उत्पादों के निर्माण पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
गडकरी ने किसानों और मिलों को आय बढ़ाने के लिए गन्ने के कचरे, बायोमास आधारित उत्पादों और जैविक खाद के उत्पादन पर काम करने की सलाह दी। इन विकल्पों से चीनी मिलों के साथ किसानों को भी नई आय मिलेगी और वे नुकसान से बच सकेंगे।