Delhi News: यदि आप मोबाइल ऐप के जरिए 10 रुपये या 100 रुपये जैसी छोटी रकम से डिजिटल गोल्ड में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। केंद्र सरकार जल्द ही डिजिटल गोल्ड सेक्टर के लिए एक नया नियामकीय ढांचा लागू कर सकती है। इसका सीधा उद्देश्य करोड़ों छोटे निवेशकों के पैसों को धोखाधड़ी से बचाना है।
निवेशकों की सुरक्षा के लिए बैठकों का दौर जारी
डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया (डीपीएमएसीआई) ने वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के साथ कई दौर की बातचीत की है। इन चर्चाओं का मुख्य लक्ष्य फर्जी प्लेटफॉर्मों पर रोक लगाना और डिजिटल गोल्ड कारोबार में पूरी तरह से पारदर्शिता लाना है। अगले वर्ष तक ये नए नियम लागू होने की उम्मीद है।
डीपीएमएसीआई में शामिल हैं प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म
उद्योग में भरोसा कायम करने के लिए करीब तीन महीने पहले डीपीएमएसीआई का गठन किया गया था। इस परिषद में सेफगोल्ड, एमएमटीसी-पंप, ऑगमोंट के साथ-साथ फोनपे और गुल्लक जैसे बड़े फिनटेक प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह संस्था मिलकर इस क्षेत्र के लिए मानक तय करने और आम ग्राहकों के हितों की रक्षा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
डिजिटल गोल्ड की मांग में भारी बढ़ोतरी
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान डिजिटल माध्यमों से करीब 10 टन सोने की खरीद की गई है। तुर्की, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रिटेन और चीन जैसे देशों में डिजिटल गोल्ड के लिए कड़े नियम पहले से लागू हैं। भारत भी अब इन्हीं वैश्विक मॉडलों का गहन अध्ययन करके अपने नियमों को अधिक सुरक्षित और सख्त बनाने की तैयारी कर रहा है।
जानिए आखिर क्या होता है डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड एक ऑनलाइन निवेश साधन है, जिसमें ग्राहक बेहद कम पैसों से 24 कैरेट शुद्ध सोना खरीद सकते हैं। खरीदे गए सोने के बराबर भौतिक सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। ग्राहक इसे कभी भी ऑनलाइन बेच सकते हैं या आभूषण के रूप में अपने घर मंगवा सकते हैं। नए सरकारी नियमों के आने से इस बाजार में सुरक्षा और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।