Business News: खेतीबाड़ी सहकारी सभाओं से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए सहकारिता विभाग ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नई पॉलिसी के तहत अब दो लाख रुपये से ज्यादा का लोन लेने पर किसानों को अपनी जमीन गिरवी रखनी होगी। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड फर्द पर बाकायदा लिमिट लोन की एंट्री दर्ज की जाएगी।
हिस्सेदारी की रकम हुई दोगुनी, छोटे और बड़े किसानों पर बढ़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ
पुराने नियमों के तहत एक लाख रुपये की लिमिट पर किसानों को हिस्सेदारी के तौर पर तीन हजार रुपये देने पड़ते थे। अब इस शर्त को कड़ा करते हुए छोटे किसानों के लिए छह हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं बड़े किसानों को इस सुविधा के लिए नौ हजार रुपये विभाग के पास जमा करवाने होंगे।
तीन लाख से अधिक के कर्ज पर ग्यारह प्रतिशत ब्याज, सब्सिडी की शर्तों में भी सख्ती
नए नियमों के तहत तीन लाख रुपये से अधिक का कर्ज लेने पर किसानों को निजी बैंकों से भी ज्यादा 11 फीसदी ब्याज चुकाना पड़ेगा। इसके अलावा यदि किसी छोटे किसान ने दूसरे बैंक से तीन लाख से अधिक का सब्सिडी लोन ले रखा है, तो उसे सहकारी सभा से दोबारा सब्सिडी का लाभ बिल्कुल नहीं दिया जाएगा।
पुराने और नए सभी खातों पर लागू होंगे नियम, जमीन बंधक रखने की बढ़ी बाध्यता
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पुराने और नए सभी किसानों के लिमिट लोन अब इसी नई पॉलिसी के आधार पर तैयार होंगे। अधिकांश किसानों के पास दो लाख से अधिक का लोन मौजूद है। इसके चलते किसानों पर न केवल भारी ब्याज और हिस्सेदारी का बोझ बढ़ेगा, बल्कि उनकी जमीन भी विभाग के पास बंधक रहेगी।
