सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन पर पाबंदी में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, हाईकोर्ट को जल्द फैसले का निर्देश

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Gir Somnath News: गुजरात के सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन की बिक्री और भंडारण पर लगी रोक हटाने से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इनकार कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के अंतरिम स्थगन आदेश में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए हाईकोर्ट को दो महीने के भीतर मामले का अंतिम निपटारा करने का निर्देश दिया है।

गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन तैयार करने, बेचने और भंडारण करने पर प्रतिबंध के मामले में रेस्टोरेंट संचालकों को शीर्ष अदालत से अंतरिम राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसने प्रतिबंध हटाने वाले एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि यह प्रकरण अभी अंतरिम स्तर पर है, इसलिए हाईकोर्ट को ही इस पर अंतिम फैसला सुनाना चाहिए।

संतुलन बनाना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। जब याचिकाकर्ताओं की ओर से खानपान की स्वतंत्रता और व्यापार पर असर का हवाला दिया गया, तो अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि रोशनी का त्योहार दिवाली मिठाई खाकर मनाएं और शाकाहार या मांसाहार के विवाद को फिलहाल छोड़ दें। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) से जुड़े व्यापक मुद्दों पर संविधान पीठ का फैसला भी संभावित है, जिसका इस तरह के मामलों पर प्रभाव पड़ सकता है।

रेस्टोरेंट संचालकों की दलीलें

रेस्टोरेंट मालिकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने पक्ष रखते हुए कहा कि खानपान व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है और राज्य किसी नागरिक पर भोजन की पसंद नहीं थोप सकता। उन्होंने तर्क दिया कि देश की करीब 80 फीसदी आबादी मांसाहारी भोजन करती है, ऐसे में इस तरह का प्रतिबंध कारोबार को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित रेस्टोरेंट पिछले लगभग 40 वर्षों से इस क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा 30 अक्टूबर को दिए गए राहत के आदेश पर उसी दिन खंडपीठ द्वारा कुछ ही घंटों में रोक लगाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

गुजरात सरकार ने श्रद्धालुओं की भावनाओं का दिया हवाला

गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि मंदिर परिसर के 500 मीटर के दायरे में प्रतिबंध पहले से प्रभावी था और बाद में कॉरिडोर का विकास किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित दुकानों और रेस्टोरेंट को शाकाहारी भोजन परोसने की पूरी अनुमति है। राज्य सरकार का रुख है कि धार्मिक स्थलों और त्योहारों के दौरान मंदिर के निकटवर्ती क्षेत्रों में मांस-मछली की बिक्री व भंडारण से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और व्यवस्था बनाए रखने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

10 अगस्त की अधिसूचना से जुड़ा है विवाद

यह कानूनी विवाद गुजरात के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 10 अगस्त को जारी अधिसूचना के बाद शुरू हुआ था। इस अधिसूचना के तहत सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और आसपास की सात निर्धारित सड़कों पर मांसाहारी भोजन पकाने, बेचने और स्टोर करने पर रोक लगाई गई थी।

इस निर्णय के खिलाफ स्थानीय कारोबारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 30 अक्टूबर को एकल पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रतिबंध हटा दिया था, लेकिन उसी दिन राज्य सरकार की अपील पर खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ 25 नवंबर को इस मामले की अगली सुनवाई करेगी।

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