Nashik News: महाराष्ट्र के नासिक में ‘पन्नालाल’ नाम के आठ वर्षीय गधे को गौशाला से छुड़ाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कालिका माता यात्रा के दौरान पशु क्रूरता निवारण कानून के तहत पुलिस ने उसे जब्त कर गौशाला भेजा था। अब पीड़ित भट परिवार के समर्थन में शिवसेना भी उतर आई है।
महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक गधे की रिहाई को लेकर अनूठा मामला सामने आया है। भट परिवार अपने पाले हुए आठ वर्षीय गधे ‘पन्नालाल’ को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है। पन्नालाल पिछले 10 दिनों से स्थानीय गौशाला में बंद है। इस मामले में अब शिवसेना भी परिवार के समर्थन में आगे आ गई है। मामला जिला कलेक्टर के संज्ञान में लाने के बाद अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की रूपरेखा तैयार की गई है।
नासिक निवासी जमुनाबाई और किशन भट ने पन्नालाल को तब से पाला है जब वह केवल दो वर्ष का था। परिवार का कहना है कि वे पन्नालाल को जानवर नहीं बल्कि अपने घर के सदस्य की तरह रखते हैं और उसके खान-पान व सेहत का पूरा ध्यान रखते हैं। अचानक उसे अलग किए जाने के बाद से पूरा परिवार बेहद परेशान है।
कालिका माता यात्रा के दौरान हुआ था विवाद
घटनाक्रम के अनुसार, नवरात्रि के दौरान भट परिवार पन्नालाल को लेकर नासिक की प्रसिद्ध कालिका माता यात्रा में गया था। यात्रा के दौरान पन्नालाल श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया और लोग उसे देखने के लिए इकट्ठा होने लगे।
इसी दौरान कुछ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भीड़ के बीच मनोरंजन के लिए गधे का उपयोग करना पशु क्रूरता के दायरे में आता है। पशु प्रेमियों की आपत्ति के बाद नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में पशु क्रूरता निवारण कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस कार्रवाई के बाद भेजा गया गौशाला
दर्ज मामले के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पन्नालाल को कब्जे में लेकर गौशाला भेज दिया। इसके बाद से ही वह परिवार से दूर है। भट परिवार ने पशु क्रूरता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी पन्नालाल के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया, बल्कि उसे परिवार की तरह स्नेह दिया है। अब शिवसेना के सहयोग से परिवार पन्नालाल की रिहाई के लिए जल्द ही सक्षम अदालत में अर्जी दाखिल करेगा।