Barmer News: बाड़मेर की जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो अदालत) ने सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में दोषी मघ सिंह को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और पीड़िता के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को सात लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
बाड़मेर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सात साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी मघ सिंह पुत्र तेजसिंह (निवासी इंदिरा नगर, बाड़मेर) को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि मासूम बच्चों के साथ ऐसा अमानवीय कृत्य करने वाले किसी भी प्रकार की नरमी या दया के पात्र नहीं हैं। अदालत ने दोषी पर 1 लाख 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके साथ ही पीड़ित बालिका और उसके परिवार के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को 7 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
विशिष्ट लोक अभियोजक (पॉक्सो) दामोदर कुमार चौधरी ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए अदालत में 20 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में 44 दस्तावेजी साक्ष्य और 18 आर्टिकल पेश किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
पुलिस जांच पर उठाए सवाल, सीसीटीवी कैमरे लगाने के दिए निर्देश
फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने पुलिस अनुसंधान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और जांच अधिकारी को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि बाल अपराधों से जुड़े संवेदनशील मामलों में पुलिस को पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ साक्ष्य जुटाने चाहिए। जांच में रही कमियों को रेखांकित करते हुए अदालत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को जिले भर के सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
19 जुलाई को दर्ज हुआ था मामला
मामले के अनुसार, 19 जुलाई 2026 को पीड़िता के पिता ने महिला थाना बाड़मेर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि उनकी सात वर्षीय बेटी घर के बाहर खेल रही थी, तभी आरोपी मघ सिंह उसे बहला-फुसलाकर बबूल की झाड़ियों में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 65(2), 96, 137(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5एम/6 एवं 11(iv)/12 के तहत आरोप पत्र अदालत में पेश किया था, जिस पर सुनवाई पूरी करते हुए अदालत ने यह सजा सुनाई।