सोशल मीडिया पर एआई मॉडरेशन से बढ़ा विवाद, क्या खत्म होना चाहिए आईटी एक्ट के सेक्शन 79 का सेफ हार्बर सुरक्षा कवच?

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New Delhi News: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एल्गोरिदम के बढ़ते दखल ने नई कानूनी बहस छेड़ दी है। पोस्ट की रीच तय करने और कंटेंट हटाने में एआई की मुख्य भूमिका सामने आ रही है। इस बढ़ते नियंत्रण के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स को आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी छूट जारी रहनी चाहिए।

आईटी एक्ट के सेक्शन 79 के तहत इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को कानूनी सुरक्षा कवच मिलता है। इसके तहत यूजर द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी गैर-कानूनी कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जाता। केवल थर्ड पार्टी कंटेंट को होस्ट करने भर से कोई भी डिजिटल मंच सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

एल्गोरिदम के संपादकीय नियंत्रण पर खड़े हो रहे हैं नीतिगत सवाल

मौजूदा प्रावधानों के अनुसार केवल एआई द्वारा कंटेंट हटाने भर से कानूनी सुरक्षा समाप्त नहीं होती है। हालांकि संसदीय समिति का तर्क है कि आधुनिक एल्गोरिदम अब सिर्फ कंटेंट स्टोर नहीं करते। वे पोस्ट्स को रैंक करते हैं, रीच घटाते हैं और यह तय करते हैं कि यूजर की स्क्रीन पर कौन सा कंटेंट दिखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई प्लेटफॉर्म कंटेंट को प्रमोट करने या दबाने में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो वह निष्पक्ष माध्यम नहीं रह जाता। यह स्थिति पारंपरिक एडिटोरियल कंट्रोल जैसी बन जाती है, जिससे प्लेटफॉर्म्स की सीधी जवाबदेही बढ़ जाती है। यह व्यवस्था मेटा समेत सर्च इंजन और अन्य सभी इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स पर समान रूप से लागू होती है।

श्रेया सिंघल मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल बनाम भारत सरकार के ऐतिहासिक मामले में प्लेटफॉर्म्स की कानूनी जिम्मेदारी को बेहद स्पष्ट किया था। अदालत ने साफ निर्देश दिया था कि किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट हटाना तभी कानूनी रूप से अनिवार्य होगा, जब सक्षम अदालत या अधिकृत सरकारी एजेंसी से लिखित आदेश प्राप्त हो।

Desh Raj
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