Delhi News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते दौर में साइबर अपराधी भी नए और एडवांस तरीके अपना रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया से जुड़ा हैकिंग ग्रुप किमसुकी अब चैटजीपीटी जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल कर रहा है। ये हैकर्स साइबर अटैक को ऑटोमेट करने और डेटा का विश्लेषण करने के लिए एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं।
ओलामा और जीपीटी4ऑल जैसे टूल्स का उपयोग
दक्षिण कोरियाई साइबर सुरक्षा फर्म जेनियंस के मुताबिक, किमसुकी ग्रुप अपने सिस्टम पर लोकल एआई टूल्स जैसे ओलामा, जीपीटी4ऑल और मस्टी इंस्टॉल कर रहा है। ये टूल्स क्लाउड सर्विस पर निर्भर रहे बिना काम करते हैं। साथ ही, रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जेनरेशन तकनीक के जरिए हैकर्स किसी भी बाहरी एआई प्लेटफॉर्म पर जानकारी भेजे बिना संवेदनशील फाइलों का विश्लेषण कर रहे हैं।
फिशिंग ईमेल से आगे बढ़े साइबर हमले
शोधकर्ताओं के अनुसार, हैकिंग ग्रुप केवल स्वाभाविक लगने वाले फिशिंग ईमेल बनाने तक सीमित नहीं है। वे एआई-असिस्टेड कोडिंग, स्पीच-टू-टेक्स्ट और एआई एजेंट डेवलपमेंट से जुड़े सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये टूल्स चोरी किए गए डेटा का तेजी से विश्लेषण करने, खतरनाक मैलवेयर विकसित करने और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए नकली दस्तावेज तैयार करने में मदद करते हैं।
ऑनलाइन स्कैम की पहचान करना हुआ मुश्किल
एआई का इस्तेमाल साइबर हमलों के हर चरण में किया जा रहा है। हैकर्स असली दिखने वाले फाइनेंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स तैयार कर लोगों को झांसे में ले रहे हैं। इस तकनीक की वजह से इंटरनेट यूजर्स के लिए फर्जी ऑफर और प्रोफेशनल दिखने वाले ईमेल की पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया है, जिससे साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।