टाइम ट्रैवलर होने का दावा करने वाले शख्स ने साल 2118 का भविष्य देखने की बात कही

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Washington News: खुद को टाइम ट्रैवलर बताने वाले अलेक्जेंडर स्मिथ नामक एक शख्स ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने 1981 में एक गुप्त मिशन के तहत उसे साल 2118 में भेजा था। उसका दावा है कि उसने भविष्य में उड़ने वाली गाड़ियां, रोबोट और तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं देखी हैं। हालांकि, इन दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

खुद को टाइम ट्रैवलर बताने वाले एक शख्स के हैरान करने वाले दावों ने इंटरनेट पर नई चर्चा छेड़ दी है। अलेक्जेंडर स्मिथ नाम के इस व्यक्ति का दावा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) ने साल 1981 में एक बेहद गोपनीय प्रयोग के तहत उसे भविष्य में यानी साल 2118 में भेजा था। स्मिथ के अनुसार, उसने 92 साल आगे की दुनिया देखी है और वह भविष्य में होने वाले बदलावों को लेकर लोगों को सतर्क करना चाहता है। हालांकि, उसके इन दावों की पुष्टि करने वाला कोई भी आधिकारिक दस्तावेज या ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है।

यूट्यूब चैनल पर चेहरे पर मास्क लगाकर किया दावा

डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, स्मिथ यूट्यूब चैनल ‘एपेक्स टीवी’ (ApexTV) के एक इंटरव्यू में सामने आया था। अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने चेहरे पर इंसान जैसी दिखने वाली नकली मास्क लगा रखी थी। इंटरव्यू के दौरान उसने कहा कि वह सीआईए के एक अत्यधिक गुप्त मिशन का हिस्सा रहा है और अब वह अपने कथित अनुभवों को दुनिया के सामने लाना चाहता है, ताकि मानवता आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रह सके।

तीसरे विश्व युद्ध और तकनीकी बदलावों की कही बात

स्मिथ ने दावा किया कि भविष्य की यात्रा के दौरान उसने आसमान में उड़ने वाली गाड़ियां, इंसानों जैसे रोबोट और एलियंस तक देखे हैं। इसके साथ ही उसने भविष्य में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने की बात भी कही। उसके मुताबिक, आने वाले करीब 100 सालों में दुनिया को इस बड़े संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

स्मिथ के दावों के अनुसार, इस संभावित युद्ध की शुरुआत अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते तनाव के कारण होगी। उसने कहा कि शुरुआत में दोनों देशों के बीच मतभेद सीमित रहेंगे, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ती जाएगी और इसमें रूस भी उत्तर कोरिया के समर्थन में आ जाएगा। इसके बाद तनाव मिसाइल हमलों में बदल सकता है। हालांकि, उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिसाइल हमले किन स्थानों पर होंगे और इससे कितनी क्षति पहुंचेगी। वैज्ञानिक समुदाय और रक्षा विशेषज्ञ ऐसे दावों को पूरी तरह काल्पनिक और अप्रमाणित मानते हैं।

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