Mandi News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग में तकनीकी विफलता के कारण सीट आवंटन से वंचित रही अनुसूचित जाति की छात्रा के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी, नेरचौक को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर छात्रा को सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पर दाखिला दे। साथ ही, प्रशासनिक लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना के लिए यूनिवर्सिटी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी, नेरचौक द्वारा नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उम्मीदवार की कोई गलती नहीं है, तो उसे प्रशासन या पोर्टल की तकनीकी विफलता के लिए बिल्कुल भी दंडित नहीं किया जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता छात्रा अंजलि कौंडल ने अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत नीट परीक्षा में 442 अंक हासिल किए थे। काउंसलिंग के दूसरे दौर में भाग लेने के लिए उन्होंने निर्धारित समयावधि के तहत 8 सितंबर को ही 1,00,000 रुपये की सुरक्षा फीस (सिक्योरिटी डिपॉजिट) ऑनलाइन जमा कर दी थी।
हालांकि, तकनीकी खामियों के चलते उनका भुगतान पोर्टल पर सीधे 29 सितंबर को प्रदर्शित हुआ। तब तक दूसरे दौर की च्वाइस-फिलिंग की अंतिम तिथि (9 सितंबर) समाप्त हो चुकी थी, जिस कारण छात्रा च्वाइस-फिलिंग की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाई और सीट आवंटन से वंचित रह गई।
दुर्लभ मामलों में अदालत का हस्तक्षेप
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि हालांकि सामान्य परिस्थितियों में मेडिकल दाखिले की अंतिम तिथि बीत चुकी है, लेकिन यह एक दुर्लभ और असाधारण मामला है। अदालत ने कहा कि जहां उम्मीदवार पूरी तरह निर्दोष है, वहां उसे न्याय दिया जाना जरूरी है।
यूनिवर्सिटी पर लगा 1 लाख रुपये का हर्जाना
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में प्रतिवादी अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी को दो सप्ताह के भीतर छात्रा को एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश देने का कड़ा निर्देश दिया है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी की लापरवाही और इसके परिणामस्वरूप छात्रा को हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये की मानहानि राशि (मुआवजा) का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।