गोरखपुर में नितिन नबीन का शक्ति प्रदर्शन, यूपी में 2027 की सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी बीजेपी

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Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन दो दिवसीय सांगठनिक दौरे पर गोरखपुर पहुंच रहे हैं। हालिया विधान परिषद चुनावों के बाद उनके इस दौरे पर पूर्वांचल के बदलते राजनीतिक समीकरणों, स्थानीय असंतोष और संगठनात्मक मजबूती पर शीर्ष नेतृत्व के साथ गंभीर मंथन होगा।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपने दो दिवसीय दौरे के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रांतीय नेतृत्व के साथ ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह यात्रा महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से शुरू होकर गोलघर स्थित प्रसिद्ध माता काली मंदिर और सरदार पटेल की प्रतिमा तक निकाली जाएगी। इस पदयात्रा के जरिए संगठन विपक्ष के कानून-व्यवस्था और छात्र आंदोलनों से जुड़े बयानों का जवाब देने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार करने की तैयारी में है। यात्रा के पश्चात एनेक्सी भवन में प्रबुद्ध वर्ग के साथ संवाद और देर शाम पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें पूर्वांचल के सामाजिक और चुनावी रोडमैप पर चर्चा की जाएगी।

शिक्षक एमएलसी चुनाव और नीतिगत असंतोष

हाल ही में संपन्न हुए गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान मतपत्रों पर ‘UGC Roll Back’ लिखे जाने की घटना सामने आई थी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और आरक्षण नीतियों को लेकर सामान्य वर्ग के युवाओं और बुद्धिजीवियों में असंतोष की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हैं। रणनीतिकार इसे परंपरागत जनाधार से जुड़े असंतोष के तौर पर देख रहे हैं, जिसने नेतृत्व का ध्यान इस दिशा में खींचा है।

प्रयागराज की घटना और आंतरिक बयानबाजी

प्रयागराज के ‘प्रबुद्ध महाकुंभ’ कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान हुए विवाद और थप्पड़ कांड का वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। इसके बाद स्थानीय विधायक द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई तीखी प्रतिक्रिया ने पार्टी के भीतर भी सामाजिक संतुलन और संवाद को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्वांचल में लंबे समय से पार्टी का मजबूत आधार रहे प्रबुद्ध और सवर्ण वर्ग के बीच सामंजस्य बनाए रखना संगठन के लिए अहम विषय बन चुका है।

पूर्वांचल के जातीय समीकरण और 2027 की रणनीति

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर जिले की सभी नौ सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि आजमगढ़ और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में समाजवादी पार्टी ने दबदबा बनाया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के ‘पीडीए’ फॉर्मूले ने पूर्वांचल की कई प्रमुख सीटों पर असर दिखाया था।

हालिया विधान परिषद की 11 सीटों में से भाजपा ने 6 और सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। ऐसे में नितिन नबीन का यह संगठनात्मक प्रवास संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने, स्थानीय चिंताओं को दूर करने और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए व्यापक सामाजिक तालमेल बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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