Washington News: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में करीब 125 डॉक्टर, नर्स और पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल्स चुनावी मैदान में उतरे हैं। कोविड-19 महामारी के बाद उपजे राजनीतिक दबाव, नीतियों में बदलाव और पूर्व प्रशासन के स्वास्थ्य संबंधी फैसलों को लेकर विशेषज्ञों ने अब सीधे नीति निर्माण में भागीदारी के लिए राजनीति का रुख किया है।
अमेरिकी चुनावी राजनीति में इस बार एक नया रुझान देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूप से कॉरपोरेट और कानूनी पृष्ठभूमि के लोगों के दबदबे वाले इस क्षेत्र में इस साल करीब 125 डॉक्टर, नर्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के चुनावी इतिहास में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की इतनी बड़ी भागीदारी पहले कभी दर्ज नहीं की गई। इन उम्मीदवारों में प्रमुख नामों के तौर पर डॉ. एमी एक्टन, डॉ. अब्दुल एल-सईद और अमेरिका के पूर्व स्वास्थ्य एवं मानव सेवा (एचएचएस) मंत्री जेवियर बेसेरा शामिल हैं।
महामारी के अनुभवों ने तय की नई राह
स्वास्थ्य कर्मियों के इस बड़े कदम की पृष्ठभूमि कोविड-19 महामारी से जुड़ी है। महामारी के शुरुआती दौर में प्रशंसा पाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को लंबे समय तक कार्यस्थल पर अत्यधिक दबाव, लगातार मौतों और संसाधनों की कमी से जूझना पड़ा था। इसके साथ ही कई प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारियों को उनके बयानों और सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों को लेकर राजनीतिक विवादों और अविश्वास का सामना करना पड़ा था।
मिशिगन के वेन काउंटी के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अब्दुल एल-सईद, जो रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के खिलाफ अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ रहे हैं, का मानना है कि चिकित्सा के दौरान सीखी गई बातें राजनीति में भी काम आती हैं। उनका कहना है कि जिस तरह एक डॉक्टर मरीज के दर्द को सुनकर उसे चिकित्सीय ज्ञान के आधार पर विकल्प समझाता है, उसी तरह राजनीति में भी जनता की समस्याओं को समझकर नीतियां बनाने की जरूरत होती है।
रटगर्स यूनिवर्सिटी के ईगलटन सेंटर ऑन द अमेरिकन गवर्नर के डायरेक्टर और इतिहासकार डॉ. क्रिस्टोफर शील्ड्स के अनुसार, विज्ञान और राजनीति के बीच संबंध हमेशा से संवेदनशील रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों का सक्रिय राजनीति में आना एक अभूतपूर्व बदलाव है।
वर्तमान में अमेरिकी संसद में स्वास्थ्य कर्मियों का प्रतिनिधित्व
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में फिलहाल स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों की संख्या काफी सीमित है। अमेरिकी सीनेट में इस समय केवल चार डॉक्टर हैं और वे सभी रिपब्लिकन पार्टी से संबंधित हैं—व्योमिंग से जॉन बैरासो, लुइसियाना से बिल कैसिडी, कंसास से रोजर मार्शल और केंटकी से रैंड पॉल।
वहीं, निचले सदन यानी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ में वर्तमान में 17 डॉक्टर, 4 डेंटिस्ट, 2 फार्मासिस्ट, एक नर्स प्रैक्टिशनर, एक ऑप्टोमेट्रिस्ट और एक रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट कार्यरत हैं।
नीतियों में बदलाव और संस्थागत चिंताएं बनीं बड़ा कारण
स्वास्थ्य पेशेवरों के चुनावी मैदान में उतरने का एक प्रमुख कारण पूर्व ट्रंप प्रशासन के दौरान स्वास्थ्य और वैज्ञानिक शोध से जुड़ी नीतियों को लेकर उपजी चिंताएं भी हैं। उस दौर में कई संघीय स्वास्थ्य विभागों से डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को हटाने, शोध फंडिंग में कटौती, स्वास्थ्य संबंधी वेबसाइटों व आंकड़ों को सीमित करने और टीकाकरण व फ्लोराइड से जुड़ी नीतियों में फेरबदल के फैसलों पर विवाद हुआ था।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) में सेवाएं दे चुकीं डॉ. क्रिस्टिन हुक टेक्सास के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेट उम्मीदवार के तौर पर दोबारा चुनाव लड़ रही हैं। उनका तर्क है कि विज्ञान देश को सुरक्षित रखने और नई खोजों के लिए जरूरी है, जिसे राजनीतिक फैसलों से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
इसी तरह, कैलिफोर्निया के गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के खिलाफ उतरे जेवियर बेसेरा का कहना है कि स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग जैसे प्रमुख संस्थानों में विज्ञान पर संदेह करने वालों के बजाय शीर्ष वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मौजूदगी आवश्यक है, ताकि देश महामारियों और स्वास्थ्य आपदाओं का मजबूती से सामना कर सके।
नीति निर्माण में सीधी हिस्सेदारी की ओर कदम
महामारी के दौरान लॉकडाउन, मास्क और वैक्सीनेशन से जुड़े निर्णयों के चलते स्वास्थ्य अधिकारी राजनीति के केंद्र में आ गए थे। कई अधिकारियों को धमकियों और विरोध का सामना भी करना पड़ा था। इन परिस्थितियों के बाद चिकित्सा क्षेत्र के कई विशेषज्ञों ने महसूस किया कि केवल स्वास्थ्य सेवाएं देने के बजाय उन नीतियों को तय करने वाली विधायी संस्थाओं का हिस्सा बनना आवश्यक है जो जनता के जीवन और स्वास्थ्य बजट को सीधे प्रभावित करती हैं।