Srinagar News: जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन सरकार के भीतर अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है। पार्टी के करीब 25 विधायकों ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली और हालिया मंत्रिमंडल विस्तार पर असंतोष व्यक्त करते हुए मोर्चा खोल दिया है। बागी विधायकों ने उपमुख्यमंत्री सहित सभी कैबिनेट मंत्रियों को 15 दिनों के भीतर बदलने और मुख्यमंत्री के सलाहकार को पद से हटाने की मांग रखी है।
जम्मू-कश्मीर की सत्ता में नेशनल कॉन्फ्रेंस की वापसी के कुछ ही समय बाद सरकार के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के करीब 25 विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कार्यप्रणाली के खिलाफ एकजुट होकर बगावती रुख अपना लिया है। विधायकों ने उपमुख्यमंत्री समेत सभी आठ कैबिनेट मंत्रियों को 15 दिनों के भीतर हटाकर मंत्रिमंडल का नए सिरे से पुनर्गठन करने की दो टूक मांग रखी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम वानी को भी उनके पद से हटाने का कड़ा दबाव बनाया गया है।
विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई गुप्त बैठक
यह राजनीतिक घमासान उस वक्त औपचारिक रूप लेता दिखा, जब पार्टी विधायक कैसर जमशेद लोन के श्रीनगर स्थित आवास पर एक गुप्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में शामिल सूत्रों के अनुसार 18 विधायक व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि सात विधायक डिजिटल माध्यम से जुड़े।
इस बैठक के दौरान विधायकों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें पार्टी के व्यापक हित का हवाला देते हुए संपूर्ण मंत्रिमंडल को बदलने और विभागों के आवंटन से पूर्व पार्टी के भीतर व्यापक विचार-विमर्श करने की बात कही गई। बैठक में मौजूद एक विधायक ने इस कदम को पार्टी के भीतर ‘आंतरिक लोकतंत्र को बहाल करने की दिशा में पहला बड़ा प्रयास’ बताया।
सरकार के शक्ति संतुलन पर उठे सवाल
90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 41 विधायकों वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस इस समय छह कांग्रेस, छह निर्दलीय और एक माकपा विधायक के समर्थन से गठबंधन सरकार संचालित कर रही है। ऐसे नाजुक आंकड़े के बीच अपनी ही पार्टी के 25 विधायकों की यह लामबंदी सरकार के स्थिरता और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रही है।
नाराज विधायकों का तर्क है कि हालिया प्रशासनिक फैसलों और मंत्रिमंडल गठन में वरिष्ठ व क्षेत्रीय नेताओं की उपेक्षा की गई है। विधायकों का एक समूह पार्टी नेतृत्व और पार्टी अध्यक्ष को अपनी मांगों का मसौदा भेजकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व इस आंतरिक संकट को किस प्रकार संभालता है।