केजीएमयू में यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव के मामलों में यूपी एसटीएफ ने शासन को सौंपी रिपोर्ट

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Lucknow News: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े 12 मामलों की जांच पूरी कर उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। करीब 10 महीने तक चली इस विस्तृत जांच में संस्थान के कई डॉक्टरों, कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े मामलों में यूपी एसटीएफ ने करीब 10 महीने की जांच के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस जांच में संस्थान से जुड़े कुल 12 मामलों की पड़ताल की गई है।

एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग के अलावा गांधी वार्ड का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इन विभागों में तैनात कई डॉक्टरों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली व भूमिका पर जांच के दौरान गंभीर सवाल उठे हैं।

कई डॉक्टरों और कर्मचारियों के नाम शामिल

जांच के दौरान संकलित साक्ष्यों और बयानों के आधार पर कई डॉक्टरों व कर्मचारियों के नाम रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की वैधानिक प्रकृति और संबंधित व्यक्तियों की वास्तविक संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष शासन स्तर पर समीक्षा के बाद ही तय होगा।

प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण और आधिकारिक जवाब के आधार पर ही इन आरोपों की अंतिम पुष्टि की जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल

रिपोर्ट में कुछ विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। यह बात सामने आई है कि पीड़ितों द्वारा की गई प्रारंभिक शिकायतों पर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए और कुछ स्तरों पर आरोपियों को संरक्षण देने के आरोप भी लगे हैं। इससे केजीएमयू की आंतरिक शिकायत निवारण समिति (आईसीसी) और प्रशासनिक जवाबदेही की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं।

शासन स्तर पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी

एसटीएफ की रिपोर्ट मिलने के बाद अब शासन स्तर पर अग्रिम कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन विभागीय जांच, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और शिकायतकर्ताओं को निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाएगा। साथ ही जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता और गरिमा की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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