खतरा महसूस होते ही पहिए की तरह लुढ़कने लगता है यह अनोखा सांप, वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन

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Tokyo News: दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला छोटा ड्वार्फ रीड स्नेक खतरा महसूस होते ही रेंगने के बजाय पहिए की तरह गोल होकर तेजी से लुढ़कने लगता है। ‘करंट बायोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह जीव केवल पांच सेकंड में लगभग 1.5 मीटर तक की दूरी तय कर शिकारी को भ्रमित कर भागने में सक्षम है।

आमतौर पर सांपों को जमीन पर रेंगकर या छिपकर अपनी जान बचाते देखा जाता है, लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में मिलने वाला ड्वार्फ रीड स्नेक (Dwarf Reed Snake) शिकारी से बचने के लिए एक अनोखा पैंतरा अपनाता है। खतरे की आहट मिलते ही यह छोटा सांप अपने शरीर को मोड़कर पहिए जैसा बना लेता है और तेजी से लुढ़कते हुए आगे निकल जाता है। इसकी इस असामान्य चाल ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है।

आकार में छोटा और बचाव का बिल्कुल अलग तरीका

ड्वार्फ रीड स्नेक आकार में काफी छोटा होता है, जिसकी सामान्य लंबाई 25 से 30 सेंटीमीटर तक होती है। अधिकांश सांप जब किसी शिकारी को देखते हैं तो वे झाड़ियों या पत्थरों के बीच तेजी से रेंगकर छिपने की कोशिश करते हैं। इसके विपरीत, यह प्रजाति अपने शरीर को पूरी तरह गोल लपेटकर चक्राकार गति (कार्टव्हीलिंग) शुरू कर देती है।

पहिए की तरह कैसे घूमता है ड्वार्फ रीड स्नेक?

‘करंट बायोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने इस सांप की विशेष गति का बारीकी से अध्ययन किया है। जापान की तोहो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, लुढ़कते समय सांप की रफ्तार सामान्य रेंगने की गति से कहीं अधिक तेज हो जाती है।

शोध के आंकड़ों के अनुसार, यह सांप लगभग पांच सेकंड में 1.5 मीटर तक की दूरी तय कर सकता है। अगर जमीन ढलान वाली हो, तो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण इसकी रफ्तार और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि, गति जमीन की सतह और भौगोलिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।

शिकारी को भ्रमित करने में मिलती है मदद

वैज्ञानिकों का मानना है कि अचानक गोलाकार बनकर लुढ़कना शिकारी को पूरी तरह भ्रमित कर देता है। तेजी से दिशा बदलने और अप्रत्याशित गति के कारण शिकारी जीव समझ नहीं पाता कि हमला कहां करना है, जिससे सांप को सुरक्षित भागने का पर्याप्त समय मिल जाता है।

इस अध्ययन का एक सबसे अहम पहलू यह सामने आया है कि तेज गति से शरीर के घूमने के बावजूद सांप अपने सिर की स्थिति और संतुलन को नियंत्रित रखता है। इससे उसे लगातार यह पता रहता है कि वह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और सुरक्षित स्थान कहां है। जीव विज्ञान में यह व्यवहार दुर्लभ माना जाता है, जो यह साबित करता है कि प्रकृति में छोटे से छोटे जीव ने भी जीवित रहने के लिए बेहद जटिल तरीके विकसित किए हैं।

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