DPDP कानून से नहीं रुकेगी खोजी पत्रकारिता, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले- संविधान देता है प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी

Share

- Advertisement -

New Delhi News: केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन तमाम आशंकाओं को खारिज किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम से खोजी पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और निजता कानून मीडिया की इस संवैधानिक स्वतंत्रता को पूरी तरह अक्षुण्ण रखता है। सरकार पत्रकारों की चिंताओं को सुनने और आवश्यक सुझावों पर विचार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब कई मीडिया संस्थानों ने अधिनियम के संभावित प्रभावों को लेकर कानूनी चिंताएं जताई हैं। मीडिया संगठनों का तर्क है कि पत्रकारिता गतिविधियों के लिए स्पष्ट छूट न होने से जनहित से जुड़ी उन खबरों की पड़ताल बाधित हो सकती है, जिनमें संबंधित पक्षों की औपचारिक सहमति के बिना जुटाई गई निजी जानकारियां शामिल होती हैं। इसके अलावा गोपनीय स्रोतों की सुरक्षा को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही थीं।

जरूरत पड़ने पर वैधानिक संरक्षण के लिए संशोधन संभव

सूत्रों के अनुसार, सरकार पत्रकारिता से जुड़ी गतिविधियों को आवश्यक संरक्षण देने और मीडिया जगत की चिंताओं के समाधान के लिए नियमों या कानून में जरूरी संशोधन पर विचार कर सकती है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने किसी औपचारिक संशोधन की घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने संपादकों और मीडिया प्रतिनिधियों को सरकार के साथ खुली चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।

आईटी मंत्री ने रेखांकित किया कि डीपीडीपी अधिनियम सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप लाया गया है, जिसमें निजता के अधिकार को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किया गया था। इस कानून का मसौदा तैयार करने से पहले समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, मीडिया प्रतिनिधियों और तकनीकी उद्योग के सभी हितधारकों के साथ एक वर्ष से अधिक समय तक व्यापक परामर्श किया गया था।

निजी जानकारी के दुरुपयोग और वैध पत्रकारिता में स्पष्ट अंतर

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डाटा निजता का अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी वैध विषय को खबर न बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के निजी डाटा के दुरुपयोग और जनहित में पत्रकारिता के तहत उसके वैध इस्तेमाल के बीच एक स्पष्ट अंतर मौजूद है। उन्होंने दोहराया कि मीडिया कर्मियों को कार्य करने की आजादी सीधे संविधान से प्राप्त है, जिसे किसी भी कानून द्वारा कमजोर नहीं किया जा सकता।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News