Dehradun News: उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में उपजे विवाद के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने गायक दलेर मेहंदी से माफी मांगने की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए उनके माफी मांगने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।
पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच कुंजापुरी मेले में हुए लाइव परफॉर्मेंस विवाद को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है। ताजा मामले में मंत्री सुबोध उनियाल ने एक इंटरव्यू के दौरान दलेर मेहंदी से माफी मांगने की मांग को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि माफी मांगने की जरूरत अपराधी को पड़ती है और उन्होंने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया है जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़े।
मैंने कोई अपराध किया जो माफी मांगूं: सुबोध उनियाल
दलेर मेहंदी से माफी मांगने के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि अगर तबीयत खराब थी, तो उन्हें कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था। यदि वे कार्यक्रम में आए भी थे, तो जनता को अपनी खराब स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि गलती करने के बाद लोगों को गुमराह किया जा रहा है, जबकि जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने वालों को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने 36 लाख रुपये का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में गलती करने वाले पक्ष को माफी मांगनी चाहिए, उनके खुद के माफी मांगने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
क्या है पूरा कुंजापुरी मेला विवाद?
उत्तराखंड के प्रसिद्ध कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की लाइव प्रस्तुति के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंच गए थे। इस दौरान उन्होंने गायक पर शराब के नशे में होने का आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की थी कि जब उनसे ठीक से बोला नहीं जा रहा है, तो वे गाना क्या गाएंगे। इस घटना के बाद दलेर मेहंदी के भाई और मशहूर गायक मीका सिंह उनके समर्थन में सामने आए थे।
मीका सिंह ने सफाई देते हुए कहा था कि दलेर मेहंदी शराब का सेवन नहीं करते हैं और हाल ही में उनकी सर्जरी हुई थी जिसके कारण वे लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की थी। बढ़ते विवाद को देखते हुए बाद में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फोन पर मीका सिंह से बातचीत कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया था, लेकिन अब मंत्री सुबोध उनियाल के इस कड़े बयान के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।