Mandi News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है, जिससे क्वाडरोटर ड्रोन दीवार जैसी सतह पर स्थिर रहकर लंबे समय तक निगरानी कर सकता है। इस नवाचार से ड्रोन की ऊर्जा बचेगी और पुलों, इमारतों तथा सुरंगों जैसे जटिल बुनियादी ढांचों का निरीक्षण बेहद सुगम हो जाएगा।
एडैप्टिव सेकंड-ऑर्डर कंटीन्यूअस कंट्रोल तकनीक से मिला संतुलन
इस नई नियंत्रण प्रणाली को एडैप्टिव सेकंड-ऑर्डर कंटीन्यूअस कंट्रोल (एएसओसीसी) नाम दिया गया है। शोध दल में प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, डॉ. नरेंद्र कुमार धर और डॉ. अनुज नंदनवार शामिल हैं। यह तकनीक तेज हवा के झोंकों और सेंसर के शोर के बावजूद ड्रोन को दीवार से संपर्क बनाते समय और उसके बाद पूर्ण संतुलन प्रदान करती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह प्रोजेक्ट जनवरी 2025 में शुरू होकर अगस्त 2025 में पूरा हुआ। दल ने पहले छोटे क्वाडरोटर में सहायक बाजू, उड़ान नियंत्रक और विशेष सेंसर जोड़े। इसके बाद गणितीय मॉडल और मैटलैब सिमुलिंक पर व्यापक परीक्षण किए गए, जिसके बाद वास्तविक ड्रोन पर इसका सफल जमीनी परीक्षण पूरा किया गया।
झुकी हुई दीवारों पर सफल परीक्षण, भविष्य में बढ़ेंगे उपयोग
तकनीक की सटीकता जांचने के लिए 100 स्वतंत्र मोंटे कार्लो सिमुलेशन किए गए। वास्तविक परीक्षणों में यह क्वाडरोटर माइनस 20 डिग्री के कोण पर झुकी दीवार पर भी सफलतापूर्वक टिकने में कामयाब रहा। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित हुआ है, जिसे विज्ञान जगत में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र कुमार धर ने बताया कि टीम अब इस तकनीक में विजन और फोर्स आधारित प्रणालियों को जोड़ने पर काम कर रही है। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग सुरंगों की जांच, दरारों की निगरानी, सेंसर लगाने और नमी मापने में किया जाएगा, जिससे औद्योगिक निरीक्षण का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।