Delhi News: कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके को करीब 24 घंटे की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया है। रविवार सुबह सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ उन्हें एग्जीक्युटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। रिहा होते ही दीपके के सामने निजी और राजनीतिक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
एक तरफ उनके संगठन ने जंतर-मंतर पर दोबारा बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ उनके इंतजार में घर पर दादी का अंतिम संस्कार रुका हुआ है। अभिजीत दीपके को शनिवार सुबह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। वह मुंबई से एक प्लेन से दिल्ली पहुंचे थे।
दीपके अपने सहयोगियों सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने आए थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्लेन से उतरते ही हिरासत में ले लिया था। हिरासत में जाने के कुछ ही घंटों बाद उनके परिवार से दादी के निधन की दुखद खबर सामने आई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक दीपके को दादी की मौत की जानकारी दी गई थी। पुलिस ने उनसे पूछा था कि यदि वह तुरंत जाना चाहते हैं तो घर पहुंचाया जा सकता है। लेकिन पुलिस के अनुसार दीपके ने हिरासत में रहकर साथियों का साथ निभाने का फैसला किया। दूसरी ओर परिवार ने इन दावों को पूरी तरह नकार दिया।
अभिजीत की मां अनीता ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिल्ली पुलिस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘पुलिस झूठ बोल रही है। यदि उसे सूचना मिली होती वह तुरंत आ गया होता। हमने उसकी दादी के अंतिम संस्कार को उसके इंतजार में रोका है।’ परिवार बेटे के लौटने का इंतजार कर रहा है।
हिरासत की घटना के बाद संगठन प्रभारी आजिंक्य शिंदे ने कमान संभाली और रविवार को दोबारा जंतर-मंतर पर आंदोलन का ऐलान किया। सीजेपी का कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में दीपके के सामने आगे के फैसले को लेकर बड़ी धर्मसंकट की स्थिति है।
सूत्रों के मुताबिक दीपके एक दिन के लिए महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जा सकते हैं। वहां दादी के अंतिम संस्कार के बाद वह दोबारा दिल्ली लौटेंगे। हालांकि पारिवारिक त्रासदी के इस समय में वह परिवार के साथ अधिक वक्त नहीं बिता पाएंगे। संगठन अब आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बना रहा है।
