New Delhi News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म वेक्ट्रा के अनुसार एआई आधारित घोटालों में 1210 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस खतरे से निपटने के लिए गूगल और एप्पल ने अपने स्मार्टफोन्स में कई सुरक्षा फीचर्स दिए हैं।
ज्यादातर ऑनलाइन फ्रॉड फोन कॉल्स और मैसेज के जरिए होते हैं। एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स पर अब इन-बिल्ट एआई टूल्स मौजूद हैं जो संदिग्ध कॉल्स, स्पैम मैसेज, अनवेरिफाइड लिंक्स और खतरनाक एप्स को तुरंत पहचानकर यूजर्स को वित्तीय नुकसान से सुरक्षित रखते हैं।
एंड्रॉयड डिवाइसेज में मिलने वाले जरूरी सुरक्षा टूल्स
एंड्रॉयड 12 और उसके बाद के वर्जन्स में फेक कॉल डिटेक्शन फीचर डिफॉल्ट रूप से मिलता है, जो फोन सेटिंग्स के ‘कॉलर आईडी एंड स्पैम’ सेक्शन में ऑन रहता है। इसके अलावा गूगल पिक्सल 9, सैमसंग एस26 और अन्य फ्लैगशिप फोन्स में रियल-टाइम स्कैम डिटेक्शन का विकल्प दिया गया है।
गूगल और सैमसंग के चुनिंदा फोन्स में कॉल स्क्रीन की सुविधा मिलती है, जहां वर्चुअल असिस्टेंट आपकी जगह कॉल हैंडल करता है। गूगल मैसेजेस में स्पैम प्रोटेक्शन ऑन करने पर संदिग्ध मैसेज पर चेतावनी दिखती है। वहीं नए सिस्टम में ओटीपी को अनऑथराइज्ड एप्स से 3 घंटे तक छिपाने की तकनीक भी दी गई है।
आईफोन यूजर्स के लिए इन-बिल्ट प्रोटेक्शन सेटिंग्स
एप्पल आईफोन में अनजान कॉल्स की स्क्रीनिंग की सुविधा मिलती है। सेटिंग्स में जाकर ‘स्क्रीन अननोन कॉलर्स’ चालू करने पर फोन कॉलर से नाम और वजह पूछता है। इसके साथ ही आईफोन अज्ञात सेंडर्स के मैसेज में दिए गए वेब लिंक्स को सीधे खोलने से रोकता है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
आईफोन में ‘स्क्रीन अननोन सेंडर्स’ फीचर ऑन करने से अनजान लोगों के मैसेज अलग फोल्डर में चले जाते हैं और उनके नोटिफिकेशन्स भी बंद रहते हैं। इन दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम्स में मौजूद एआई फीचर्स को समय पर ऑन करके यूजर्स ऑनलाइन ठगी और साइबर हमलों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।