Delhi News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि साल 2029 तक सभी एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। इस बड़े बयान के बाद गठबंधन में शामिल प्रमुख घटक दलों ने बेहद सतर्क रुख दिखाया है। सहयोगी दलों का कहना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा आवश्यक है।
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता लवू श्री कृष्ण देवरायालु ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि पार्टी स्तर पर अभी इस विषय पर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। भविष्य में कोई भी कदम उठाने से पहले समाज के सभी वर्गों और संबंधित पक्षों से राय ली जाएगी।
सहयोगी दलों ने उठाई सर्वसम्मति और व्यापक विचार विमर्श की मांग
बिहार में जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वे इस मामले में जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि सभी समुदायों में आपसी सहमति जरूरी है। इसके बिना इतने बड़े कानूनी बदलाव को जमीन पर लागू करना उचित नहीं होगा।
लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने भी पूरी सावधानी के साथ अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी देश की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय अधिकारों का पूरा सम्मान करती है। सरकार को पहले इसका आधिकारिक मसौदा सामने रखना चाहिए, जिसके बाद सभी पक्षों से मशविरा करके अंतिम फैसला लिया जाएगा।
राज्यों के जरिए समान नागरिक संहिता आगे बढ़ाने की सरकारी रणनीति
अयोध्या में राम मंदिर और धारा 370 हटने के बाद यह विषय सत्ताधारी दल की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है। इसे पूरे देश में एक साथ लागू करने के बजाय राज्य स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश ने कानून पारित कर दिया है।
मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गृह मंत्री ने वर्ष 2029 के आम चुनाव से पहले सभी 21 राज्यों का लक्ष्य तय किया था। महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी इस पर काम जारी है। हालांकि केंद्र में सरकार चला रहे गठबंधन के साथियों की सतर्कता को देखते हुए राह इतनी आसान नहीं दिखती।