Washington News: अमेरिका की प्रमुख कंपनियों में नई पीढ़ी जेन-जी के कर्मचारियों के कामकाज, बातचीत के तरीकों और पेशेवर व्यवहार को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी कंपनियां नए कर्मचारियों की वर्कप्लेस रेडीनेस और बुनियादी कौशल विकास से संतुष्ट नहीं हैं।
ऑफिस में ईमेल भेजने के सही नियम, मीटिंग में असहमति दर्ज कराना और बॉस से संवाद साधना युवाओं के लिए मुश्किल बना हुआ है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मिले डेटा की सही जांच करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। इन व्यावहारिक समस्याओं से वर्कप्लेस पर तनाव बढ़ रहा है।
सर्वे में 71 फीसदी कंपनियों ने नए छात्रों को माना अधूरा तैयार
नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेज एंड एम्प्लॉयर्स के सर्वे अनुसार, 71 फीसदी कंपनियों ने माना कि नए ग्रेजुएट्स काम के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं 75 फीसदी संस्थान इन कर्मियों के प्रदर्शन से नाखुश हैं। करीब 37 फीसदी बॉस युवाओं की जगह रोबोट और एआई से काम लेना बेहतर समझते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान स्कूल-कॉलेज बंद रहने, स्क्रीन टाइम बढ़ने और ऑनलाइन पढ़ाई से सामाजिक संपर्क बेहद सीमित हो गया था। इस वजह से युवाओं की कम्युनिकेशन स्किल्स काफी कमजोर हुईं। इसके अलावा साल 2000 के बाद से कंपनियों द्वारा दी जाने वाली बुनियादी ट्रेनिंग और मेंटरशिप में भी भारी गिरावट आई है।
विशेषज्ञों ने कंपनियों को दी ट्रेनिंग और मेंटरशिप की सलाह
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर टेसा वेस्ट के मुताबिक तकनीकी हुनर सिखाना आसान है, लेकिन बातचीत और मतभेद सुलझाना सीखने में वक्त लगता है। वहीं पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर कैपेली ने कहा कि सिर्फ छात्रों को दोष देने के बजाय कंपनियों को भी अपने स्तर पर मजबूत ट्रेनिंग देनी चाहिए।
तोशिबा के चीफ एचआर जेसन डेसेंट्ज का मानना है कि कॉलेज और कॉरपोरेट सेक्टर को मिलकर युवाओं को ऑफिस कल्चर सिखाना होगा। नए कर्मचारियों को बातचीत के सही तौर-तरीके और एआई टूल्स के सटीक उपयोग की ट्रेनिंग देकर ही इस बड़ी खाई को सफलतापूर्वक पाटा जा सकता है।