Kampala News: युगांडा के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज जनरल मुहूजी काइनेरुगाबा ने संदिग्ध सीरियल किलर मूसा मुजुरिजी की गिरफ्तारी का दावा किया है। सेना प्रमुख के अनुसार, आरोपी पर 2010 से 2025 के बीच 38 लोगों की हत्या करने और उनके शवों को खाने का आरोप है। हालांकि, नरभक्षण से जुड़े दावों की आधिकारिक फॉरेंसिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
अफ्रीकी देश युगांडा में सुरक्षा बलों ने मूसा मुजुरिजी नाम के एक संदिग्ध सीरियल किलर को गिरफ्तार करने का दावा किया है। युगांडा के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) जनरल मुहूजी काइनेरुगाबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि आरोपी पर देश के तीन जिलों में 38 लोगों की हत्या करने और उनके शवों को खाने का गंभीर आरोप है। जनरल काइनेरुगाबा ने उसे देश के इतिहास का सबसे खतरनाक अपराधी बताया है।
आर्मी चीफ ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सुरक्षा बलों ने मुजुरिजी को पकड़ लिया है। उन्होंने दावा किया कि आरोपी ने वर्ष 2010 से 2025 के बीच मसाका, इबांडा और काजो जिलों में 38 लोगों की जान ली। उन्होंने कहा कि आरोपी पर सार्वजनिक तौर पर कानूनी प्रक्रिया के तहत मुकदमा चलाया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर मृत्युदंड दिलाने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अन्य अपराधियों को चेतावनी देते हुए सुधरने की नसीहत दी।
पुराने मामलों की जांच और पुलिस रिकॉर्ड
मुजुरिजी का नाम पहली बार एक दशक से भी पहले चर्चा में आया था। वर्ष 2012 और 2013 के दौरान युगांडा के मसाका और रकाई इलाकों में कई हिंसक वारदातें हुई थीं। उस समय हमलावर घरों की दीवारों में सुराख बनाकर अंदर घुसते थे और धारदार हथियारों से लोगों पर हमला करते थे। जनवरी 2013 में पादरी स्टीवन मुगाम्बे के परिवार के नौ सदस्यों की हत्या के बाद पुलिस की जांच तेज हुई थी।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की तत्कालीन स्पेशल टीमों ने पूछताछ के आधार पर मुजुरिजी को चिह्नित किया था। उस दौरान उस पर कई हत्याओं में शामिल होने के संदेह में कार्रवाई की गई थी। हालांकि, वह कई बार न्यायिक व पुलिस हिरासत से बचने या रिहा होने में सफल रहा, जिससे वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा।
हाल ही में 16 अक्टूबर 2026 को फ्रेड मुजुलिजी उर्फ कुलैश कामुगिशा को एक महिला की हत्या के मामले में अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद पुलिस ने वर्ष 2012 के पुराने अनसुलझे मामलों की फाइलों को दोबारा खोलकर जांच शुरू की। इसी सिलसिले में आम लोगों से भी शिकायतें ली जा रही थीं। इसके बाद सेना प्रमुख ने 26 अक्टूबर को उसकी गिरफ्तारी और नरभक्षण के आरोपों का सार्वजनिक दावा किया।
नरभक्षण के दावों पर फॉरेंसिक जांच की आवश्यकता
सेना प्रमुख द्वारा लगाए गए नरभक्षण के आरोप बेहद गंभीर हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक वैज्ञानिक या फॉरेंसिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विधिक और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत में ऐसे आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूतों की आवश्यकता होती है।
इस प्रकार के गंभीर मामलों में जांच एजेंसियां अपराध स्थल से मिलने वाले जैविक साक्ष्य, डीएनए प्रोफाइलिंग, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, चश्मदीदों के बयान और संदिग्ध के ठिकानों से बरामद भौतिक वस्तुओं की जांच करती हैं। वर्तमान में यह आरोप केवल जांच के दायरे में मौजूद दावा है, जिसकी पुष्टि वैज्ञानिक रिपोर्टों और अदालती प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
इबांडा और काजो जिलों में सुरक्षा अभियान तेज
लगातार हो रही हिंसक घटनाओं के बाद इबांडा और काजो जिलों में पुलिस और सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान तेज कर दिए हैं। 19 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने दोनों जिलों में लूटपाट और जानलेवा हमलों के संदेह में कई लोगों को हिरासत में लेने की पुष्टि की थी। इनमें 28 वर्षीय अयूब बोगेरे भी शामिल था, जिसे दो घातक हमलों का संदिग्ध माना गया है। पुलिस के अनुसार, बोगेरे का संबंध 12 अक्टूबर 2026 को पकड़े गए हिक्सन तुसिमे उर्फ कबुटो से भी पाया गया है। पुलिस अब इन सभी मामलों के तार जोड़कर संगठित अपराध की जांच कर रही है।