खराब परफॉर्मेंस का बहाना बनाकर महिला को नौकरी से निकाला, कोर्ट ने कंपनी पर ठोका 22 लाख का जुर्माना

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Delhi News: कंपनियां अक्सर ‘खराब परफॉर्मेंस’ का हवाला देकर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देती हैं। सिंगापुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां महिला कर्मचारी की बड़ी जीत हुई है। एम्प्लॉयमेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (ECT) ने कंपनी को 22 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।

महिला अप्रैल 2025 में एक कंपनी में ऑडिट मैनेजर के तौर पर 6 महीने के प्रोबेशन पर जुड़ी थी। प्रोबेशन पूरा होने के बाद कंपनी ने खराब प्रदर्शन की बात कहकर उसे पक्का करने से मना कर दिया। महिला ने इस फैसले को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी, जहां सुनवाई के बाद उसकी जीत हुई।

बिना चेतावनी और गुप्त मानकों पर नौकरी से निकालने का आरोप

महिला ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उसे काम को लेकर कोई औपचारिक या अनौपचारिक चेतावनी नहीं दी गई थी। उसे ऐसे पैमानों पर परखा गया, जो कभी शेयर ही नहीं किए गए थे। हालांकि, पर्याप्त सबूत न होने से भाषा के आधार पर भेदभाव के आरोप ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिए।

कंपनी का दावा था कि प्रोबेशन पास करने के लिए 80% ओवरऑल स्कोर जरूरी था, जबकि महिला को 71% अंक ही मिले। लेकिन ट्रिब्यूनल ने पाया कि सुपरवाइजर ने महिला को इस रेटिंग सिस्टम के बारे में कभी जानकारी ही नहीं दी थी। इसके अलावा कंपनी की खुद की समीक्षा नीति का भी पालन नहीं किया गया था।

ट्रिब्यूनल ने पकड़ा कंपनी का झूठ, दिया अधिकतम मुआवजा

ट्रिब्यूनल के मजिस्ट्रेट जोएल टैन ने कहा कि सुपरवाइजर ने महिला के मुख्य काम में कोई कमी नहीं पाई थी। शिकायतें केवल प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ी थीं। कोर्ट ने माना कि कंपनियां उन मानकों पर किसी को नहीं परख सकतीं, जिनकी जानकारी पहले से कर्मचारी को न दी गई हो।

महिला की मासिक सैलरी 11,500 सिंगापुर डॉलर थी। गलत तरीके से नौकरी से निकाले जाने पर ट्रिब्यूनल ने उसे अधिकतम तय सीमा के तहत 30,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 22 लाख रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि नियमों के कारण अधिकतम सीमा ही तय की जा सकी है।

Desh Raj
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