Islamabad News: अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हाल ही में हुई हिंसक झड़पें अचानक प्रशासनिक विफलता का परिणाम नहीं हैं। अमेरिकी पत्रिका ‘जैकोबिन’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन वर्षों से चले आ रहे आर्थिक संकट और इस्लामाबाद द्वारा किए जा रहे राजनीतिक दमन का नतीजा हैं।
दिखावटी स्वायत्तता और हेरफेर से बनती है सरकार
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पीओके को भले ही स्वायत्त क्षेत्र के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन इसकी स्वायत्तता केवल कागजों तक सीमित है। जब भी स्थानीय नागरिक अधिकारों की मांग करते हैं, तो इस्लामाबाद बल प्रयोग करता है। आरक्षित सीटों में हेरफेर करके ही पाकिस्तान अपनी मनपसंद सरकार बनवाता है।
दशकों का सबसे बड़ा जनआंदोलन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई
पीओके में पांच जून से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जनआंदोलन बन गया है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौतों का वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक है।
महंगाई, बिजली दरें और चुनावी धांधली का आरोप
आक्रोश का मुख्य कारण बिजली की बढ़ती दरें, ईंधन की महंगाई और गिरता जीवन स्तर है। इस बीच, रविवार को हुए मतदान में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) ने भारी धांधली का आरोप लगाया है। पीपीपी नेताओं का कहना है कि दर्जनों केंद्रों पर पोलिंग स्टाफ समय पर नहीं पहुंचा, जिससे लोग वोट नहीं डाल सके।