Kathmandu News: नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के चलते सीमा से सटी 40 किलोमीटर लंबी सड़क, एक प्रमुख बॉर्डर पोस्ट और कई बस्तियां बह गईं। रक्षा बंधन और श्रावण पूर्णिमा के त्योहार के कारण इलाके में हजारों ट्रेकर्स और हिंदू तीर्थयात्री मौजूद थे।
अधिकारियों के मुताबिक इस बाढ़ का सीधा असर नदी के बहाव क्षेत्र में 100 किलोमीटर दूर तक देखा गया है। प्रभावित क्षेत्र स्थानीय आजीविका का बड़ा आधार है और पर्यटन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस सीजन में कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ गोसाईंकुंड और दामोदर कुंड में स्नान के लिए भारी भीड़ जुटती है।
त्योहारी सीजन में अचानक बढ़ी थी श्रद्धालुओं की संख्या
नेपाल के पूर्व पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने बताया कि रक्षा बंधन और श्रावण पूर्णिमा पर ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। सीमावर्ती इलाकों से आने वाले यात्रियों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड न होने के कारण आपदा में फंसे लोगों की सही संख्या का अनुमान लगाना बेहद कठिन है।
मध्य नेपाल के बागमती प्रांत स्थित रसुवा जिला अपने ट्रेकिंग रूट्स और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां मौजूद लांगटांग नेशनल पार्क और 4,380 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गोसाईंकुंड झील श्रद्धालुओं के मुख्य केंद्र हैं। भोटे कोशी नदी किनारे स्थित स्याब्रुबेसी और तिमुरे का व्यापारिक गलियारा भी आपदा से प्रभावित हुआ है।
अपर मुस्तांग और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर असर
अपर मुस्तांग और सुम घाटी जैसे सुदूर ट्रेकिंग क्षेत्र भी इस पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े हैं। मुस्तांग का दामोदर कुंड और 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों के लिए बेहद पवित्र हैं। इसके अलावा डोल्पा क्षेत्र में स्थित शे गोम्पा भी प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार कठिन भौगोलिक स्थिति के बावजूद अगस्त के महीने में बड़ी संख्या में लोग इन दुर्गम रास्तों पर यात्रा करते हैं। अचानक आए इस जलप्रलय ने ट्रेकिंग रूट्स और स्थानीय आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे पूरे हिमालयी क्षेत्र में बचाव अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।