Dhaka News: बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने बृहस्पतिवार को कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच नदी जल बंटवारे के मसले केवल संवाद और कूटनीति से सुलझाए जा सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि बातचीत में ठोस प्रगति तभी संभव है, जब दोनों देशों का नेतृत्व आपसी सहयोग की मजबूत इच्छाशक्ति दिखाएगा।
सरकारी न्यूज एजेंसी बीएसएस के मुताबिक, कबीर ने कहा कि सीमा पार बहने वाली नदियों के मुद्दे बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर सुलझाए जाएंगे। वे ‘पानी के भविष्य पर पुनर्विचार’ विषयक संगोष्ठी के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय मसलों को लेकर हमारी यही स्पष्ट स्थिति है।
गंगा जल संधि और साझा नदियों पर सहयोग की जरूरत
सीमा पार नदियों और गंगा जल बंटवारा संधि पर कबीर ने कहा कि दोनों पक्षों में बातचीत लगातार जारी है। एक सकारात्मक नतीजा दोनों देशों के अधिकारियों और नेतृत्व की ईमानदारी पर निर्भर करता है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और सभी स्तरों पर सकारात्मक संवाद बनाए रखने की आवश्यकता जताई।
कबीर ने जानकारी दी कि बांग्लादेश ने इन जल मामलों पर विचार के लिए एक समिति गठित की है। वहीं भारत सरकार भी अपने स्तर पर इन विषयों की समीक्षा कर रही है। दोनों देशों के बीच 54 सीमा पार नदियां बहती हैं, जिनके मसले संयुक्त नदी आयोग के मंच पर सुलझाए जाते हैं।
दिसंबर 2026 में पूरी हो रही है 30 साल पुरानी गंगा जल संधि
गौरतलब है कि तीस्ता नदी जल बंटवारे का विवाद भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से एक अहम विषय बना हुआ है। तीस्ता विवाद गंगा जल समझौते से पूरी तरह अलग है। दोनों देशों ने वर्ष 1996 में 30 साल की अवधि के लिए ऐतिहासिक गंगा जल बंटवारा संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
यह महत्वपूर्ण जल समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है, जिसे लेकर कूटनीतिक स्तर पर हल तलाशने की कोशिशें तेज हैं। दोनों देशों के जल विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों के बीच भविष्य की रूपरेखा तय करने को लेकर मंथन जारी है, ताकि सीमावर्ती आबादी के हितों को सुरक्षित रखा जा सके।