Islamabad News: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले साल मई में हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष पर दिए एक बयान को लेकर पाकिस्तान की एंटी साइबर क्राइम ब्रांच ने उन्हें समन जारी कर सोमवार को इस्लामाबाद दफ्तर में पेश होने का आदेश दिया है।
नियाजी पर सोशल मीडिया के जरिए सरकारी संस्थाओं को बदनाम करने और फर्जी नैरेटिव फैलाने का आरोप लगा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि मई 2025 का भारत-पाकिस्तान संघर्ष दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मिलीभगत थी, जिसका मकसद पाकिस्तानी सेना की छवि सुधारना था।
अब्राहम समझौते और इजरायल से जोड़कर दिया बयान
नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने शनिवार को नोटिस जारी कर कहा कि नियाजी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ कंटेंट फैलाती पाई गई हैं। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने पिछले साल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए चार दिवसीय सशस्त्र संघर्ष में पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई को कम आंका।
नोरीन नियाजी ने बिना किसी सबूत के दावा किया कि भारत ने इस संघर्ष को आगे बढ़ाने से इसलिए परहेज किया, क्योंकि पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने की दिशा में बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना का असल मकसद इस्लामाबाद को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने में मदद करना था।
सरकारी खेमे में तीखी प्रतिक्रिया, बयान की हुई निंदा
बता दें कि पाकिस्तान इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है। वहीं अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्थता वाला एक समझौता है, जिसने इजरायल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक रिश्ते स्थापित किए हैं। नियाजी के इस बयान पर पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
पंजाब की सूचना और संस्कृति मंत्री आजमा बोखारी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि नोरीन नियाजी की बातें उनके भाई इमरान खान की सोच को दर्शाती हैं। उन्होंने पीएम मोदी के समर्थन में कही गई बातों को बेहद निंदनीय और देश हित के खिलाफ बताया।